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कोई आधा तो कोई पूरा टैक्स छूट का कर रहा वादा

3 वर्ष पहले
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नगर निगम के चुनाव प्रचार में अब तेजी आ गई है। प्रचार गाड़ियों के भोंपू की आवाज से लोगों की सुबह की नींद खुल रही है। कोई होल्डिंग टैक्स को आधा करने का वादा कर रहा है तो कोई पूरा ही टैक्स माफ करने का दावा कर रहा है, इतना ही नहीं वह स्टाम्प पेपर पर अपने वायदों को भी लिख कर देने को तैयार है। अपने वार्ड को स्वर्ग जैसा सुंदर बनाने का दावा। गलियां प्रत्याशियों के रंग बिरंगे बैनर, पोस्टर और फ्लैक्स से पट चुका है। अब तक 50 से ऊपर प्रत्याशियों ने लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति ली है। इससे अधिक प्रत्याशियों ने प्रचार वाहन के लिए भी चुनाव पदाधिकारी से मंजूरी ली है। नगर निगम चुनाव के सभी जामताड़ा और मिहिजाम क वार्डों में कोई एेसी गली नहीं है जहां प्रचार गाड़ियां नहीं चल रही है। चुनाव प्रचार में इस बार बैटरी रिक्शा के अलावा ऑटो का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं कई प्रत्याशी डोर टू डोर जाकर लोगों से मतदान की अपील कर रहे हैं। चौक-चौराहों पर नुक्कड़ नाटक का भी दौर जारी है।

नगर निगम चुनाव में कुछ प्रत्याशी स्टॉप पर अपने वायदे लिखकर मतदाताओं को देने की कह रहे बात
खोरठा से लेकर भोजपुरी और हिंदी गानों से हो रहा चुनाव प्रचार
प्रचार में प्रत्याशी वोटर के हिसाब से फिल्मी गानों पर रिकार्डिंग करा रहे हैं। जिसमे खोरठा गाने से लेकर भोजपुरी और हिंदी गाने की डबिंग भी खूब बज रही है। एक गाने की रिकार्डिंग पर प्रत्याशी पांच से 5-10 हजार रुपए तक खर्च कर रहे हैं। हर उम्र के मतदाताओं की पंसद को ध्यान में रखते हुए गानों की रिकॉर्डिंग हो रही है। रिकार्ड कराने की मांग इतनी है कि सुबह सात बजे से लेकर रात के 11 बजे तक काम करना पड़ रहा है।

वाट्सएप बना प्रचार का सबसे बड़ा माध्यम : नगर निकाय चुनाव में खड़े प्रत्याशी सोशल मीडिया साइट पर अपना कैंपेन जम कर चला रहे हैं। इसमें कोई खर्च की सीमा नहीं है। प्रत्याशी प्रचार के लिए फेसबुक से लेकर वाट़्सअप का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। ग्रुप बनाकर प्रत्याशी मैसेज भेज रहे हैं। इसको लेकर कई प्रत्याशियों ने टीम बना रखी है। टीम के सदस्य साइट पर वीडियो, ऑडियो, फोटो आदि लोड कर अपनी मंशा व वादे लोगों के समक्ष रख रहे हैं। साथ ही समाज के लिए किए गए अपने कार्यों पर भी फोकस कर रहे हैं। प्रत्याशी जानते हैं कि आज सोशल मीडिया का जमाना है। हर हाथ में स्मार्ट फोन है, ऐसे में यदि उनकी बात लोगों तक खासकर युवाओं तक पहुंच जाती है, तो चुनाव में उनकी नैया पार लग सकती है। एक प्रचार वाहन में प्रत्याशी रोजाना 3500 से 4000 रुपए का खर्च कर रहे हैं। इनमें म्यूजिक सिस्टम से लेकर ड्राइवर, तेल और खलासी का मेहनताना शामिल है।

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