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एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन से बढ़ेगी किसानों की आय

3 वर्ष पहले
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खेती में कम समय में अधिक उत्पादकता पाने के लिए किसान रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं। इन कैमिकल कीटनाशकों के प्रयोग से फसलों के साथ-साथ किसानों की सेहत पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। ऐसे में अगर किसान सही समय पर एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम) तकनीकों का प्रयोग करें, तो वो खेती में लागत के साथ साथ समय भी बचा सकते हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डाॅ.आशीष त्रिपाठी ने बताया किसान खेती के दौरान एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन तकनीकों का प्रयोग करें, तो वो अपनी खेती की लागत 30 से 40 प्रतिशत कम कर सकते हैं। इन तकनीकों में व्यवहारिक नियंत्रण, यांत्रिक नियंत्रण, अनुवांशिक नियंत्रण और जैविक नियंत्रण तकनीक शामिल हैं। पानी की उपलब्धता होने पर किसान जायद मौसम में मुख्य रूप से लौकी, करेला, कद्दू, खीरा, तरबूज, खरबूज, घीया, टिण्डा, परवल उगाते हैं । सब्जी उत्पादन की उन्नत तकनीकी का प्रयोग करने के बावजूद किसान ज्यादा पैदावार नहीं ले पाते हैं।

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