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लहसुन खरीद 12 तक, किसानों के लिए गाइड लाइन भी नहीं

3 वर्ष पहले
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केंद्र सरकार की ओर से लहसुन की फसल को समर्थन मूल्य पर खरीदने की घोषणा हो चुकी है। 13 अप्रैल से 12 मई तक लहसुन की खरीद करने के निर्देश जारी हुए। अभी तक किसी प्रकार की सूचना स्थानीय किसानों को नहीं मिलने और समय बीतते जाने से किसानों में रोष है। किसानों के अनुसार एक माह का समय है। अभी तक कोई सूचना नहीं मिली कि कहां तोल कांटा होगा, क्या प्रक्रिया रहेगी।

लहसुन की समर्थन मूल्य पर खरीद के आदेश आने के बाद किसानों ने लहसुन की सार सम्हाल करना शुरू कर दिया। छटाई से लेकर कट्टों में भरना और उनको काटने के कार्य में तेज़ी आ गई। लहुसन को सरकारी कांटों पर तुलाने के लिए ज़मीन की नकल गिरदावरी सहित पटवारी की रिपोर्ट अनिवार्य होती है। ऐसे में पटवारियों के क्षेत्र में काफी पद खाली होने और ऐसे मंडलों के पटवारी नहीं मिलने से किसानों को चक्कर काटने होंगे। कम समय में सभी कार्य करवाना होगा।

किसानों ने मांग की है कि तहसीलदार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए ताकि समीप के मंडल का पटवारी नकल और अन्य कार्य करें। सरकार को लहसुन की तुलाई रामगंजमंडी कृषि उपज में भी करवानी चाहिए। ताकि किसानों को कोटा तक जाने की परेशानी नहीं उठानी पड़े। कम दाम होने से कोटा तक ले जाना किसानों पर अतिरिक्त भार होगा। उपप्रधान मोतीलाल अहीर ने बताया कि क्षेत्र में लहसुन की फसल का उत्पादन बड़े पैमाने पर हुआ है। सरकार वैसे भी किसानों को काफी कम समर्थन मूल्य दे रही है। इसके बाद पटवारी नहीं होने से किसानों को नकल के लिए भटकना पड़ेगा। सरकार को एक कांटा रामगंजमंडी कृषि उपज मंडी में भी स्थापित करना चाहिए ताकि किसान को लाभ मिल सके। प्रधान भगवान सिंह धाकड़ ने बताया कि वो उच्च अधिकारियों के संपर्क में है। शहर की कृषि उपज मंडी में समर्थन मूल्य पर लहुसन की खरीद केंद्र बनवाने का पूरा प्रयास है।

मोड़क स्टेशन. क्षेत्र में लहसुन की छंटाई में जुटा किसान परिवार।

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