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सरकारी अस्पताल में टीबी का मुफ्त इलाज, हर महीने Rs.500 भी मिलते हैं

3 वर्ष पहले
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2025 तक टीबी की बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सेहत विभाग की ओर से इसके टेस्ट व इलाज पूर्ण तौर पर मुफ्त किए जा रहे हैं। मोगा जिले के सेहत विभाग ने छ महीने में 1025 संदिग्ध मरीजों की मुफ्त जांच की है, जिनमें से 800 मरीज टीबी से ग्रस्त पाए गए। इनका मुफ्त इलाज चलने के साथ-साथ सेहत विभाग अब उन्हें अच्छा भोजन देने के लिए 500 रुपए महीने की सहायता राशि भी दे रहा है। डब्ल्यूएचओ (विश्व सेहत संगठन) की स्कीम के तहत यह प्रोग्राम चल रहा है। इस मर्ज को जड़ से खत्म करने के लिए राज्य सरकार की ओर से विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें टीबी के मरीजों की पहचान करने के पश्चात मरीज का उपचार पूरी तरह से मुफ्त में किया जा रहा है। इसके टेस्ट के लिए एक्सरे भी मुफ्त किए जाते हैं और अब सेहत विभाग ने सीबी नॉट नामक अत्याधुनिक मशीन को सिविल अस्पताल में स्थापित किया है, जो अभी तक टीबी की पहचान के लिए पांच सौ से अधिक टेस्ट कर चुकी है।

सुशील जैन।

राज्य सरकार के विशेष प्रयास, 2025 तक करना है जिले को टीबी मुक्त, सेहत विभाग 800 टीबी मरीजों का कर रहा मुफ्त इलाज

सिविल अस्पताल में सीबी नॉट मशीन 10 जनवरी को स्थापित

मोगा सिविल अस्पताल में सीबी नॉट मशीन 10 जनवरी 2018 को स्थापित किया गया। यह कंप्यूटराइज्ड जांच मशीन है, जिससे मरीज के थूक, बलगम से बैक्टीरिया संबंधी रिपोर्ट ली जाती है। इससे कम समय में एक्युरेट रिजल्ट मिलता है।

टीबी संक्रामक रोग है : सीएमओ सुशील जैन

सीएमओ सुशील जैन ने बताया कि टीबी का इलाज फ्री है और इसके सभी टेस्ट व दवाएं भी सरकारी अस्पतालों में फ्री में उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 6 महीने में 1024 संदिग्धों लोगों की जांच हो चुकी है। इसमें सीबी नॉट प्रणाली के तहत 405 व अन्य सरकारी सेहत केन्द्रों में 500 से ज्यादा लोगों ने संभावित टीबी के रोग की जांच करवाई है। सीएमओ ने बताया कि टीबी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे में फैलती है। यह आम तौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। सबसे कॉमन फेफड़ों की टीबी ही है। इसके अलावा ब्रेन, यूटरस, मुंह, लीवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है।

गरीबों के लिए वरदान है स्कीम | मोगा के एक स्लम एरिया में रहने वाले मरीज सुरजीत सिंह के बेटे रमिंदर सिंह ने बताया कि पिछले 3 महीनों से उसके पिता का टीबी का इलाज सिविल अस्पताल में चल रहा है। वह गरीबी के कारण पहले अपने पिता का इलाज कराने से असमर्थ थे। जब उन्हें इस सरकारी स्कीम का पता चला तो उसने अपने पिता का इलाज शुरू कराया है, जो ठीक हो रहे हैं। ऐसे में हम उनका जीवन बचाने में सफल हुए हैं।

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