सड़कों पर घूम रहे गौवंश के लिए प्रशासन और निगम जिम्मेदार : कीमती भगत
गौधन कमीशन के पूर्व चेयरमैन कीमती भगत ने जिले भर में सड़कों पर घूम रहे गौवंशों की दयनीय हालत के लिए प्रशासन व नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में मोगा के गांव किशनपुरा में गौशाला बनाने व खर्चे के लिए जिला प्रशासन को 2 करोड़ की राशि दी थी परंतु वहां भी हालत दयनीय है। कीमती भगत ने साफ तौर पर कहा कि पंजाब के सभी जिलों में से मोगा में सबसे अधिक बेसहारा पशु हैं, जिनकी संख्या पांच हजार से अधिक है। पिछली सरकार में उन्होंने मोगा के किशनपुरा गांव में 18 एकड़ जमीन सरकारी गौशाला के लिए उपलब्ध करवाने के बाद उसे सभी सुविधा प्रदान करने के लिए 2 करोड़ रुपए मोगा डीसी को दिए। उस समय के मोगा डीसी को बार-बार कहे जाने के बाद भी दो करोड़ रुपए के खर्च का हिसाब नहीं दिया गया। हालात ये हैं कि 18 एकड़ जमीन पर गौशाला के लिए दो करोड़ रुपए देने के बाद गौशाला में आज 270 बेसहारा गायों को रखा गया है। इस गौशाला को कम से कम तीन हजार बेसहारा पशुओं की संभाल के लिए तैयार करवाया गया था।
पंजाब में सबसे अधिक बेसहारा पशु मोगा जिले में
मोगा में मीडिया से बातचीत करते गौधन कमीशन के पूर्व चेयरमैन कीमती भगत।
पंजाब की गौशालाओं के लिए जारी हुए थे 44 करोड़
बेसहारा पशुओं के कारण बीते तीन सालों में चार सौ से अधिक लोग मौत का शिकार बने और दस हजार से अधिक लोग घायल हुए। करीब 9 सौ मामलों में घायल या मरने वाले व्यक्तियों की एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी। कीमती भगत ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि आंकड़ों के आधार पर उन्होंने गौ सेवा कमीशन का चेयरमैन रहते हुए पंजाब की सभी गौशालाओं के लिए 44 करोड़ रुपए जारी करवाए थे। प्रत्येक जिले के लिए औसतन दो करोड़ रुपए की राशि कम राशि नहीं थी, लेकिन किसी भी जिला प्रशासन ने इस राशि का हिसाब कमिश्नर के मांगे जाने के बाद भी नहीं दिया।
गौशाला के नाम की 3912 एकड़ जमीन खाली करवाने के लिए करेंगे जनांदोलन
पंजाब के चार प्रमुख राजाओं में पटियाला, नाभा, कपूरथला और फरीदकोट के राजाओं ने गायों की संभाल और उनके चारे के लिए 3912 एकड़ जमीन विभिन्न जिलों में छोड़ी थी। 3912 एकड़ जमीन के दस्तावेज कीमती भगत प्रत्येक जिले से इकट्ठा करवा चुके हैं और उन दस्तावेजों पर संबंधित जिले के डीसी की मोहर भी है। गौ संभाल के लिए दावे करने वाले कई मंत्री और कई दिग्गज गाय के नाम पर छोड़ी गई जमीनों पर कब्जा किए हुए हैं, जिन्हें छुड़वाने के लिए जन आंदोलन चलाया जाएगा। गौशालाओं के नाम पर पब्लिक फंड से जारी हुए पैसे का प्रत्येक जिले के डीसी से पाई-पाई का हिसाब लिया जाएगा और भ्रष्ट अधिकारियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी। कीमती भगत ने सरकार को चेताया है कि गौ संभाल के लिए यदि उन्हें भूख हड़ताल या सड़कों पर बैठना पड़ा तो उसके लिए वह गुरेज नहीं करेंगे।