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गुरुद्वारा गाेदावरीसर के सरोवर में स्नान कर किए गुरु साहिबान की निशानियों के दीदार
भास्कर संवाददाता । कोटकपूरा
नई फसल की आमद व पंजाबी संस्कृति के खुशियों का त्योहार बैसाखी कोटकपूरा व आस-पास के क्षेत्र में श्रद्धा व उत्साह से मनाई गई। इस अवसर पर कोटकपूरा व आस-पास के गांवों में स्थित सभी गुरुद्वारों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के भोग डाले गए। कोटकपूरा के गुरुद्वारा पातशाही दशमी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उपस्थित संगत को गुरु चरणों से जुड़ने का संदेश देते हुए वक्ताओं ने कहा कि इस दिन श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना कर सिख जगत को शुद्धता का मार्ग दिखला जीवन बसर करने की प्रेरणा दी थी, लेकिन आज का खालसा अपने मूल अस्तित्व से भटक गया है। जिस केशों की शान को बनाए रखने के लिए सिख गुरुओं एवं अन्य महापुरुषों ने अपनी जान तक की बाजी लगा दी आज का युवा गर्व आधुनिकता के बहाने इन्हें कटवा अपनी पहचान खोता जा रहा है। उन्होंने सिख संगत को सिख गुरुओं के दिखाए धर्म व आत्मिक बल के मार्ग पर चलते हुए युवा वर्ग को अपनी संस्कृति से जोड़ने की अपील की।
नजदीकी गांव ढिल्लवां कला में आयोजित मेले के दौरान हजारों की संख्या में संगत ने गुरुद्वारा गाेदावरीसर के सरोवर में स्नान किया व गुरुद्वारा वस्त्र स्थान में पड़े गुरु साहिबान के वस्त्रों व ऐतिहासिक निशानियों के दर्शन किए। उल्लेखनीय है कि गुरुद्वारा वस्त्र स्थान में प्रथम गुरु श्री नानक देव जी, श्री गुरु अर्जन देव जी व गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा दी गई कई निशानियां हैं जिनके बैसाखी वाले दिन संगत को खेल दर्शन करवाए जाते हैं।
गांव ढिल्लवां कलां में आयोजित बैसाखी मेले के दौरान पवित्र सरोवर में स्नान करती संगत।
बच्चों ने रंग-बिरंगी पोशाक में पेश किया भंगड़ा
फरीदकोट | फरीदकोट के डिज्नी प्लेवे स्कूल में बैसाखी धूमधाम से मनाई गई। स्कूल की प्रिंसिपल नीतू कक्कड़ ने बताया कि बैसाखी का दिन खालसा पंथ के सृजना दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सिखों के दशम् गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की नींव रखी थी। इस महीने किसानों की गेहूं की फसल भी तैयार हो जाती है। किसान भी बैसाखी वाले दिन तैयार फसल को काटने के बाद पंजाबी विरसे से भरपूर कुर्ता-चादर डाल कर मेले में जाकर अपनी खुशी मनाते हैं। बच्चों रंग-बिरंगी पोशाक पहनकर खूब भंगड़ा पेश किया। (रमन)
विद्यार्थियों ने पेश किए बैसाखी से संबंधित कविताएं और गीत
मोगा | राजिंदरा पब्लिक स्कूल में बैसाखी के अवसर पर बच्चों ने शब्द का गायन किया। उसके बाद अध्यापक अंजू जिंदल ने बच्चों को बैसाखी की महत्ता बताई। विद्यार्थियों ने इस मौके बैसाखी से संबंधित कविताएं व गीत पेश किए। इस मौके क्विज, ड्राइंग एंड पेंटिंग प्रतियोगिता भी करवाई गई। बच्चों ने पंजाबी सभ्याचार से संबंधित प्रोग्राम पेश किए। प्रिं. सुधा केआर, चेयरमैन वासू शर्मा, डायरेक्टर सीमा शर्मा ने बैसाखी की बधाई दी।
नशे का त्याग कर गुरुओं के दर्शाए मार्ग पर चलें : संत बाबा गुरदीप सिंह
बाघापुराना | आज का दिन सिख कौम का ऐतिहासिक दिन माना गया है, क्योंकि यह दिन खालसा पंथ का साजना दिवस के तहत मनाया जाता है। इस दिन श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने पांच प्यारे साजे और सिख कौम की अलग पहचान बनाई। उक्त बातें धार्मिक स्थान गुरुद्वारा शहीद बाबा तेगा सिंह तप स्थान सच्चखंड निवासी संत बाबा नछत्तर सिंह जी चंदपुराना के मुख्य सेवादार संत बाबा गुरदीप सिंह ने बैसाखी के पवित्र दिवस पर आयोजित समागम में कही। उन्होंने कहा कि राह से भटकी युवा पीढ़ी नशे का त्याग कर गुरुओं के दर्शाए मार्ग पर चले। इस अवसर पर गुरजंट सिंह, इंद्रजीत सिंह, मेजर सिंह, देव सिंह, बलविंदर सिंह, डॉ. अवतार सिंह, चमकौर सिंह, दविंदर सिंह, राजू सिंह, जगा सिंह आदि उपस्थित थे। (विकी/ नौहरिया)
गांव ढिल्लवां कलां के गुरुद्वारा साहिब में संगत के दीदार को रखी सिख गुरुओं की निशानियां।