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बोलीं-रेप बहस से नहीं, बेटों को संस्कार देने से होंगे खत्म

3 वर्ष पहले
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हाल ही में श्रीनगर के कठुआ व देश के अन्य हिस्सों में हुई रेप की घटनाओं को लेकर टीवी पर बहस करते राजनीतिक पार्टी के नेताओं व सड़कों पर मोमबत्तियां लेकर जुलूस निकालते संगठनों को डॉ. सैफुद्दीन किचलू सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्राओं ने आइना दिखाया।

रेप की घटनाओं पर देश में बनी स्थिति पर इन छात्राओं ने मॉर्निंग असेंबली में हुई बहस में हिस्सा लेते हुए कहा रेप को लेकर जिस प्रकार से राजनीतिक पार्टियां टीवी बहस में एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रही हैं, उससे रेप की घटनाएं कम नहीं होंगी, और बढ़ेंगी। बहस करने वालों में अगर जरा सी भी नैतिकता है, और वे ईमानदारी से चाहते हैं कि देश में फिर किसी मासूम के साथ ऐसी दरिंदगी न हो तो वे पहले अपने घर से शुरूआत करें। अपने बेटों को संस्कार दें, वे खुद संकल्प लें कि उनके परिवार या रिश्तेदार में से कोई लड़का किसी लड़की के साथ दरिंदगी नहीं करेगा, जिस दिन टीवी पर बहस की बजाय लोगों में अपने-अपने परिवारों के बेटों को ये संस्कार देने की होड़ शुरू हो जाएगी, उस दिन इस देश की बेटियां सुरक्षित हो जाएंगी।

इस पूरी बहस के दौरान पीठासीन अधिकारी की भूमिका स्कूल के डीन मलकीत सिंह ने निभाई। स्कूल के चेयरमैन सुनील गर्ग एडवोकेट ने कहा कि छात्राओं ने देश के इस ज्वलंत मुद्दे पर जिस प्रकार बेबाकी से हिस्सा लेते हुए इसका हल सुझाया है, जो बातें उन्होंने उभारी हैं उस पर सही मायने में अमल होना चाहिए। छात्राओं द्वारा बहस में उठाए मुद्दे व समाधान के मुख्य बिन्दुओं को स्कूल देश के प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को ईमेल व पत्र के माध्यम से पहुंचाएगा, ताकि जनभावना से देश की ज्वलंत समस्या का हल निकले। आने वाले समय में भी स्कूल में इस प्रकार के गंभीर मुद्दों पर बहस जारी रहेगी।

केबीएस में गंभीर मुद्दे पर बहस करती छात्राएं।

समस्या सिर्फ नारे लगाने से हल नहीं होगी | छात्रा रूपम व गुरुदमन ने बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि जो लोग ऐसी घटनाओं के बाद सड़कों पर मोमबत्तियां लेकर निकल पड़ते हैं, ये पीड़ित के प्रति संवेदना व्यक्त करने का एक तरीका हो सकता है, लेकिन सिर्फ सड़कों पर अपनी संवेदना करने तक इस अभियान को सीमित नहीं रखना चाहिए, उन्हें भी ईमानदारी से अपने बेटों को संस्कार देने का संकल्प लेना चाहिए। समस्या तभी हल होगी, सिर्फ नारे लगाने से नहीं होगी।

खुद को महज टीवी स्क्रीन पर चमकाने मात्र की सियासत बंद होनी चाहिए

छात्रा कनिका, सिमरत व जसप्रीत ने सुझाव दिया कि टीवी पर बहस शुरू होने से लोग दो पाले में बंट जाते हैं, एक पक्ष अपराधियों के साथ खड़ा हो जाता है, दूसरा उसके खिलाफ। खुद को महज टीवी स्क्रीन पर चमकाने मात्र की ये सियासत बंद होनी चाहिए। सियासतदानों को ईमानदारी से समस्या को खत्म करने की दिशा में आगे आना चाहिए।

रेपिस्ट को सख्त से सजा मिलनी चाहिए| कनिका शर्मा न श्रेया ने कहा कि रेपिस्ट को सख्त से सजा मिलनी चाहिए, लेकिन किसी एक रेपिस्ट को फांसी देने मात्र से समस्या हल नहीं होगी। बलात्कार की प्रवृत्ति एक मानसिकता है, जब तक परिवार में संस्कारों के माध्यम से बेटों को संस्कारित नहीं करेंगे, ये मानसिकता खत्म नहीं होगी। इसके अलावा किरनजोत, जशन, सिमरनदीप कौर गिल, जसप्रीत कौर ने भी महिला सशक्तिकरण एवं वर्तमान परिस्थिति विषय पर हुई बहस में हिस्सा लिया।

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