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हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नगर निगम ने नहीं हटवाए शहर से कब्जे

3 वर्ष पहले
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ऐसा लगता है जैसे कोर्ट के आदेश कोई मायने नहीं रखते क्योंकि बार-बार आदेशों के बाद भी काम नहीं हो पा रहे। इनको हम तीन मामलों में समझने की कोशिश करेंगे। इनमें पहले मामले में हाईकोर्ट ने 2008 में कहा था शहर से अवैध कब्जे हटाओ, लेकिन अवैध कब्जे आज भी बरकरार हैं, दूसरे में हाईकोर्ट ने कहा कि निजी अस्पतालों के नार्म्स पूरे कराओ पर निगम ने सिर्फ नोटिस निकाले और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। तीसरे मामले में स्थाई लोक अदालत ने 13 अप्रैल तक जिस काम को मंडी बोर्ड अधिकारियों को करने को कहा वो अभी तक अधूरा है।

दूसरे मामले में निजी अस्पतालों के नार्म्स अधूरे होने पर हाईकोर्ट ने उन्हें पूरे कराने के निर्देश जारी किए थे। इस पर निगम अधिकारी सिर्फ निजी अस्पतालों को नोटिस देने तक ही सीमित हैं। कार्रवाई के नाम पर एक निजी अस्पताल को सील करने के ड्रामा किया था। बिना नार्म्स पूरे कराए तीसरे दिन उसकी फिर से अस्पताल खोल दिया गया। इस संबंधी नगर निगम के कमिश्नर जगविंदर सिंह ने कहा की मामला अदालत में विचाराधीन है। कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जा रहा है।

तीसरे मामले में 36 साल पहले नई अनाज मंडी में रिहायशी प्लाटों को काटा गया था। मंडी बोर्ड वहां बुनियादी सहुलियतें देने में नाकाम रहा। जिन लोगों ने प्लाट खरीदे थे, पानी व सीवरेज की सुविधा न होने के चलते वो उदासीन रहे। समय के चलते उन प्लाटों पर झुग्गी झौंपड़ी वालों को कब्जा हो गया।

हाईकोर्ट ने 2008 में सिटी से अवैध कब्जे हटाने के दिए थे निर्देश

2015 में अदालत के निर्देशों को न मानने की चल रही कंटेम्प्ट रिट के बावजूद शहर में अवैध कब्जे बरकरार हैं। यहां बता दें कि 2003 में हाईकोर्ट ने मोगा में अवैध कब्जों को हटाने के लिए स्वयं संज्ञान लेकर रिट नंबर सीडब्ल्यूपी 4886- 2003 को चलाया और 2008 को कोर्ट ने तत्कालीन नगर कौंसिल को इन अवैध कब्जों को हटाने के निर्देश दिए थे। नगर कौंसिल के अधिकारियों ने हाईकोर्ट के निर्देशों को न केवल ठेंगा दिया, बल्कि 2015 तक इन अवैध कब्जों की संख्या में बढ़ौतरी भी हो चुकी थी। इसके बाद आरटीआई एक्टिविस्ट सुरेश सूद ने 2015 में अदालत के फैसले पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर अदालत के निर्देशों की अवहेलना पर कंटेन्ट रिट फिर से हाईकोर्ट में दायर कर दी।

2016, 17 और 18 में कार्रवाई के बाद 60 प्रतिशत तक भी नहीं हटे कब्जे

अदालत के सख्त होने पर जनवरी व फरवरी, 2016 को अवैध कब्जे हटाने का 1 सप्ताह लगातार अभियान चलाया, परंतु अवैध कब्जे 40 प्रतिशत भी नहीं हट पाए। इसके बाद फिर शांति व सन्नाटा पसरा रहा। कोर्ट की तारीक नजदीक आने पर कुछ दुकानदारों के सड़क पर पड़े सामान को हटाने की कार्रवाई कर अखबारी कटिंग के सहारे निगम वक्त कटी करता रहा। 2017 में कोर्ट ने फिर सख्ती की तो तो निगम कर्मियों ने कबाड़ बाजार तथा भीम नगर कैंप में कार्रवाई डाली। जनवरी 2018 को निगम ने बड़े आप्रेशन किए परंतु हकीकतन सफलता 60 प्रतिशत भी नहीं पाई गई।

कोर्ट ने 13 अप्रैल को कब्जे हटाने के दिए थे आदेश, अभी तक नहीं हुई कोई कार्रवाई

36 साल बाद एडवोकेट कृष्ण कुमार गुप्ता ने स्थाई लोग अदालत में इस्तगासा डालकर मंडी बोर्ड अधिकारियों को बुनियादी सहुलियतें देने व अवैध कब्जों को छुड़ाने के लिए गुहार लगाई थी। इस पर अदालत ने मंडी बोर्ड अधिकारियों को 13 अप्रैल, 2018 तक अवैध कब्जे हटाकर प्लाटधारकों को बुनियादी सहुलियतें देने के निर्देश जारी किए हुए हैं। एक महीने से ज्यादा समय बीतने इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों का कहना है कि उन्हें कुछ राशि जमा करा दी है।

मंडी में झुग्गी-झोंपड़ी वालों के कब्जे।

जहां कब्जे हटे, वहां फिर से हो गए|मई, 2018 को कमिश्नर नगर निगम ने एक पब्लिक नोटिस निकाला, जिसमें उन्होंने माना निगम ने जहां-जहां से कब्जे हटाए थे। वहां फिर से अवैध कब्जे हो गए हैं, जिन्हें लोग स्वयं हटा लें, नहीं तो निगम कार्रवाई करेगा। अवैध कब्जे बरकरार हैं। निगम नोटिस निकाल कर फिर से गहरी नींद में है।

23 को पटीशनर्स ने रखना है अपना पक्ष| 23 मई को पटीशनर्स ने अपना पक्ष रखना है। इस में पटीशनर अपनी असहमती जताते हुए अदालत में पिन आउट करेगा कि कुछ स्थानों पर अब भी खोखे हैं, जिन से 31 मार्च के बाद न तो किराया लिया गया और न ही उन्हें हटाया गया। अनाज मंडी में अवैध कब्जे बरकरार हैं, दुकानदारों के अवैध कब्जे वैसे के वैसे हैं।

झोंपड़ी वालों को हटने के दे दिए हैं निर्देश : मंडी बोर्ड सेक्रेटरी वजीर सिंह

इस संबंधी सेक्रेटरी मंडी बोर्ड वजीर सिंह का कहना है कि मार्केट कमेटी की ओर से बिजली, पानी व सीवरेज प्रोजेक्ट पर आने वाले 35 लाख के खर्चे में से 28 लाख की राशि को कार्यकारी इंजीनियर मंडी बोर्ड के पास जमा करा दिया गया है। उन्होंने झुग्गी झोंपड़ी वालों को वहां से हटने के निर्देश दे दिए हैं। इस मामले में डीसी मोगा को भी सूचित किया गया है।

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