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25 साल पुराने बस स्टैंड को तोड़ा, यहां आती थी सिर्फ प्राइवेट बसें

3 वर्ष पहले
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गमाडा के सिटी सेंटर सेक्टर-62 में तीन दशकों से चल रहे बस स्टैंड को शनिवार को ताेड़ने का काम शुरू कर दिया गया। शनिवार को गमाडा की टीम ने पांच जेसीबी मशीनों की मदद से बस स्टैंड एरिया के आसपास गहरी खुदाई की, ताकि कोई भी बस दोबारा से इधर न आ सके। बस स्टैंड के आंगन में जो सड़कें बनाई गई थी, उन्हें भी मशीनों से खोदकर उखाड़ दिया गया है। प्लेटफाॅर्म भी तोड़ दिया गया, ताकि कोई बस खड़ी जा सके। बस स्टैंड पर बनाए गए टिकट काउंटर्स भी तोड़ दिए गए। आने वाले समय में जो बस स्टैंड का शेड बना हुअा है, उसे ऑक्शन कर बेचा जाएगा। जिस जमीन से बस स्टैंड हटाया जा रहा है, वह गमाडा के सिटी सेंटर की कमर्शियल साइट है। इसकी वैल्यू अरबों रुपए आंकी जा रही है।

एक साल पहले बस स्टैंड बंद करने की हुई थी नोटिफिकेशन: बाबा बंदा सिंह बहादुर एसी इंटर स्टेट बस टर्मिनल फेज-6 में बनने के बाद करीब एक साल पहले इस पुराने बस स्टैंड को बंद करने की नोटिफिकेशन डीसी के ओर से जारी की गई थी। इसके बाद इस बंद कर नए बस टर्मिनल पर काम शुरू कर दिया गया था। बस स्टैंड गमाडा के अधिकार में है। उन्होंने उस समय इसे नहीं तोड़ा था। नए बस टर्मिनल का उद‌्घाटन केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की ओर से किया गया था।

चुनाव के बाद प्राइवेट बस चालकों ने खोला पुराना बस स्टैंड: विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आने से 6 दिन पहले प्राइवेट बस चालकों ने इस पुराने बस स्टैंड को बंद करने के लिए गमाडा द्वारा लगाई कांटेदार तारांें को उखाड़ फेंका था। इसके बाद दोबारा से यहां से बसें चलाना शुरू कर दी थीं। इसको उन्होंने लोकल कांग्रेसी नेताओं, एसोसिएशन्स, कर्मचारी संगठन तथा अकाली नेताओं का सहारा भी लिया। परिणाम यह हुआ कि पिछले सवा साल से यह बस स्टैंड प्राइवेट बसांे के अड्डे के तौर पर चलता रहा। न यहां कोई पंजाब रोडवेज का अड्डा इंचार्ज होता था और न ही पंजाब रोडवेज इसकी मेंटेनेंस कर रही थी।

1992 में बनाया गया था बस स्टैंड
नया बस टर्मिनल हो रहा है प्रभावित...पुराना बस स्टैंड अवैध रूप से चलाए जाने का मुख्य कारण गमाडा द्वारा इस बस स्टैंड को हटाने या यहां बसों के आवागमन पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई न करना था। इस कारण प्राइवेट बस चालक यहां से अपने हिसाब से बसें चला रहे थे। इसका सीधा असर नए बस टर्मिनल पर पड़ रहा था। यहां पर बसों का आवागमन जहां कम है, वहीं सवारियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। प्राइवेट बस चालक मोहाली फेज-8 बस स्टैंड के नाम पर सवारी बैठाते थे लेकिन सवारियों को खरड़ या बलौंगी आकर अन्य बसों में भेजते थे।

आतंकवाद के दौर के बाद बनी बेअंत सिंह की कांग्रेसी सरकार के समय इस बस स्टैंड का निर्माण हुआ था। 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह ने बस स्टैंड का उद‌्घाटन किया था। करीब 25 सालों बाद अब इस बस स्टैंड को खत्म कर दिया गया है। इस एरिया में पुडा, एजुकेशन बोर्ड, विकास भवन, फॉरेस्ट भवन जैसे बड़े सरकारी संस्थान हैं। इसका फायदा प्राइवेट बस चालक उठा रहे थे। इस बस स्टैंड से 90 फीसदी तक प्राइवेट बसों का आवागमन था।

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