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नए बस स्टैंड जाने के बजाय पुराने से ही बसें चलाने पर अड़े बस ड्राइवर

3 वर्ष पहले
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गमाडा की ओर से फेज-8 का पुराना बस स्टैंड तोड़कर उसे डिमोलिश कर दिया गया है। ताकि, शहर की बस सर्विस फेज-6 स्थित नए बाबा बंदा सिंह बहादुर इंटरस्टेट बस टर्मिनल से चलाई जा सके। लेकिन, प्रइावेट बस चालक अभी भी पुराने बस स्टैंड से बस सर्विस चलाने पर अड़े हुए हैं और अब बस स्टैंड पुरी तरह से बंद होने के बाद बस चालको ने फेज-8 स्थित बस स्टैंड के बाहर सड़क से ही बस सर्विस शुरू कर दी है और सड़क से ही सवारियों को बस में चढ़ाने और उतारने का काम किया जा रहा है। फेज-8 के पुराने बस स्टैंड को तोड़ने के बाद करीब चार दिन बाद भी बस चालक पुराने बस स्टैंड से ही बस सर्विस चलाने पर अड़े हुए हैं और अब भी सड़को पर बसे लगाकर वहां से ही सवारियों को चढ़ाने-उतारने का काम किया जा रहा है।

राजनीति की भेंट चढ़ा करोड़ों की लागत से बना न्यू बस टर्मिनल: अकाली सरकार के दौरान फेज-6 स्थित बनाया गया बाबा बंदा सिंह बहादुर बस टर्मिनल राजनीति की भेंट चढ़ गया था। अकाली सरकार द्वारा तैयार किए गए बस टर्मिनल के बाद पंजाब में कांग्रेस की सरकार आई और उसके बाद ही फेज-6 में बनाया गया न्यू बस टर्मिनल बंद कर दिया गया था और दौबारा से फेज-8 स्थित पुराने बस टर्मिनल से ही बस सर्विस का कार्य शुरू किया गया था। वहीं, नए बस टर्मिनल को बंद करने के बाद वहां पर मैनटेनेस का काम भी ठप हो गया था। जिसके बाद दौबारा से फेज-8 का पुराना बस स्टैंड चालू हो गया था।

एयरपोर्ट की तर्ज पर बनाया गया था बस टर्मिनल

पंजाब का एक मात्र फुली एसी बस टर्मिनल जो की फेज-6 में बनाया गया था। ऐसी बस टर्मिनल के रूप में शहर के लोगों को एक सौगात दी गई थी, जोकि सरकारों की आपसी खिंचातान में लोगों से छिनकर रह गई थी। लेकिन, अब जब प्रशासन की ओर से पुरा बस स्टैंड तोड़ दिया गया है, ताे एक बार फिर से नया बस स्टेंड शुरू होने की उम्मीद लोगों में बंध गई है। लेकिन, प्राइवेट बस चालकों की ओर से अभी भी पुराने बस स्टैंड से ही बस सर्विस को चलाने पर अड़े होना लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।

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