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166 पशु पालकों पर एफआईआर के लिए कमिश्नर ने लिखा एसएसपी को

3 वर्ष पहले
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शहर में आवारा पशुओं के साथ साथ सड़कों पर सबसे अधिक पालतू पशु घूमते दिखाई देते हैं। गत दिवस जिस बछड़ी से टक्कर होने के कारण एक व्यक्ति की मौत हुई और बछड़ी की टांग टूटी, वह भी पालतु है। पालतू पशुओं के आवारा घूमने को लेकर कई बार हाउस की बैठक में भी गर्मागर्मी हो चुकी है। नगर कमिश्नर की ओर से एसएसपी को शहर के 166 ऐसे पशु पालकों की लिस्ट देकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा गया है, जिनके पशु आवारा घूमते निगम रिकॉर्ड में पाए गए हैं। इन सभी को नोटिस देकर अपने पशुओं को शहर से बाहर ले जाने के लिए कहा गया था। कुल 178 पशु पालकों को नोटिस दिए, जिनमें से 12 ने तो अपने पशु शहर से बाहर कर लिए हैं, लेकिन 166 ऐसे हैं, जिन्होंने निगम के नोटिस को दरकिनार किया है। इन सबके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एसएसपी कार्यालय में शिकायत लंबित पड़ी है। अगर ऐसा ही रहा तो शहर की सड़कों को पशुओं से मुक्त करने में कामयाबी नहीं मिलेगी।

सड़कों पर पालतू से ज्यादा लावारिस मवेशी: शहर की हद तथा हद से बाहर गांवों के लोग अपने पालतू पशुओं को छोड़ देते हैं ताकि अगर निगम की टीम उनके घर चेक करने आए तो पशु न मिलें। इसी के चलते आवारा के साथ साथ पालतू गायें व भैंसें सड़कों पर सुबह शाम घूमती दिखाई देती हंै। यही हादसों का कारण बन रही हैं। आवारा अधिकतर पशुओं को तो गऊशाला में शिफ्ट किया गया है, लेकिन पालतु पश निगम की कैटल कैचर टीम के लिए परेशानी बने हुए हैं।

विधायक ने पकड़वाए पशु, मालिक छीनकर ले गए

सेक्टर-71 में पार्षद प्रिंसिपल अमरीक सिंह सोमल के आग्रह पर पार्क में पशु बांधने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने पार्क में बंधे हुए पालतू पशुओं काे विधायक बलबीर सिंह सिद्धू को दिखाया। सिद्धू ने मौके पर पहुंच कर निगम के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। कैटल कैचर टीम के मौके पर पहुंचने के बावजूद पशु मालिक अपने पशु वहां से छीन कर ले गए थे।

पशु पकड़ने वाली टीम पर हमला कर ले जाते हैं मालिक...कैटल कैचर टीम जहां आवारा पशुओं को पकड़ती है, वहीं वह पालतू पशुओं को भी नहीं छोड़ती है, लेकिन पालतू पशुओं को पकड़ने से यह टीम कतराती है। इसका एक ही कारण है कि जब कभी भी ये टीम कोई पालतू पशु पकड़ती है तो उसके मालिक इस टीम को रास्ते में घेर कर अपने पशु छुड़वा कर ले जाते हंै। अगर कोई विरोध करता है तो उसकी पिटाई कर कर दी जाती है। पुलिस को कई बार पिटाई से संबंधित शिकायतें की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में शहर में लावारिस और पालतू पशुओं को पकड़ना मुश्किल बना हुआ है।

हाउस की मीटिंग में करीब 20 बार मुद्दा उठा, कमिश्नर को दिए थे कार्रवाई के अधिकार...

पालतू पशुओं और उनके मालिकों की गुंडागर्दी का मामला हाउस में करीब 20 बार उठा, जिसे लेकर मेयर और सभी पक्षों के पार्षदों ने एकमत से पशु पालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। गांवों से संबंधित पार्षदों ने पशु पालकों को डेयरी के लिए अलग से जमीन देने का सुझाव दिया और यह फैसला किया गया कि पालतू पशुओं को जुर्माना लेकर छोड़ा जाएगा। अगर कोई पशु एक सप्ताह तक निगम के पास रहता है तो वह निगम की प्रॉपर्टी होगा, उसे मालिक को नहीं दिया जाएगा और निगम कमिश्नर को कार्रवाई करने के लिए हाउस की ओर से पूरा समर्थन दिया गया।

नोटिस का असर सिर्फ 12 पशु पालकों पर...निगम कमिश्नर ने शहर के करीब 178 पशु पालकों को नोटिस जारी कर एक महीने के अंदर शहर से बाहर ले जाने के निर्देश दिए थे। नोिटस की सीमा जनवरी माह के शुरू में पूरी हो गई थी। इस नोटिस का असर पशु पालकों पर नहीं दिखा। 178 में से मात्र 12 ऐसे हैं, जो अपने पशु शहर से बाहर ले गए, बाकी सभी ने इस नोटिस को तव्वजो नहीं दी। जिसे लेकर निगम की ओर से एसएसपी को इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने को लिखा गया है। दो महीने गुजरने के बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

शहर को पालतु पशुओं से मुक्त करवाने के लिए सभी पशु पालकों को नोटिस भेजे गए थे, लेकिन 166 पालकों ने इस नोटिस का पालन नहीं किया, जिस कारण इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को कहा गया है। -संदीप हंस, कमिश्नर , नगर निगम, मोहाली

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