लेबर रूम को बना दिया जनरल वार्ड, अस्पताल में काेई वॉशरूम नहीं
मोहाली शहर की फैक्ट्रियों और इंडस्ट्री में काम करने वाले करीब दो लाख कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए इंडस्ट्रियल एरिया फेज-7 में बने ईएसआईसी अस्पताल की हालत इतनी बदतर है कि यहां लेबर रूम को जनरल वार्ड बना दिया गया है। पूरे अस्पताल में मरीजों के लिए एक भी वॉशरूम तक नहीं है। यह हालत इसलिए है, क्योंकि अस्पताल की रिपेयर के नाम पर बिल्डिंग में ताेड़फोड़ कर दी गई है। रिपेयर के लिए तोड़े गए अस्पताल के वार्ड रूम और वॉशरूम 7 महीनों से रिपेयर नहीं किए गए हैं। अब अस्पताल में न तो कोई जनरल वार्ड रूम बचा है और न कोई वॉशरूम है। ऐसे में अस्पताल में किसी मरीज को एडमिट ही नहीं किया जा रहा, बल्कि उन्हें या तो दवाएं देकर वापस भेज दिया जाता है या दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल की रिपेयर के लिए ठेका अक्टूबर 2017 में दिया गया था और दो महीने में यानी दिसंबर 2017 में काम पूरा करने की डेडलाइन रखी गई थी, लेकिन अभी तक यानी 7 महीने में भी काम पूरा नहीं किया गया। इस मामले में हाईकोटर्ट में चल रहे केस की सुनवाई 24 मई को है, जब अस्पताल प्रशासन को जवाब देना है कि कितना काम हो चुका है।
एमआईने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका: मोहाली इंडस्ट्री एसोसिएशन (एमआईए) की ओर से ईएसआईसी अस्पताल की खस्ताहालत को लेकर हाईकोर्ट में ईएसआईसी के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। एमआईए ने अपनी याचिका में कहा था कि सिर्फ मोहाली से ही कर्मचारियों के करोड़ों रपए हर महीने ईएसआईसी को फंड के रूप में दिए जा रहे हं, ताकि कर्मचारियों को बेहतर मेडिकल सुविधाएं दी जा सकें, लेकिन अस्पताल की हालत खस्ता होने के कारण मरीजों को बेहतर सुविधाएं तो दूर, जान बचाने के लिए इलाज तक नहीं मिल रहा है।
ईएसआईसी ने रिपेयर के लिए दिए थे 42.65 लाख: एमआईए के लेबर लॉ कमेटी के चेयरमैन एडवोकेट जसबीर सिंह ने बताया कि अस्पताल की हालत के बारे में हाईकोर्ट में केस डाले जाने के बाद सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ईएसआईसी के रीजनल डायरेक्टर को अस्पताल की रिपेयर करवाने के लिए फंड मुहैया करवाने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि ईएसआईसी अस्पताल की रेनोवेशन के लिए 85.30 लाख रुपए दे। इसके बाद ईएसआईसी ने कोर्ट में डायरेक्टर हेल्थ सर्विस (डीएचएस) ईएसआईसी को 42.65 लाख का चेक अस्पताल की रिपयेर के लिए सौंपा था। काम पूरा होने के बाद बकाया राशि 42.65 लाख दी जानी है।
7 महीने से अटका है काम, दो महीने में करना था पूरा: एमआईए के लेबर लॉ कमेटी के चेयरमैन एडवोकेट जसबीर सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट में जब ईएसआईसी के रीजनल डायरेक्टर सुनील तनेजा ने डीएचएस ईएसआईसी को राशि का चेक सौंपा गया था तो डीएचएस ने कहा था कि वो दो महीनों में अस्पताल को रिपेयर कर मरीजों के तैयार कर देंगे। इसके बाद अक्टूबर 2017 में जोबन कंस्ट्रक्शन कंपनी को अस्पताल की रिपेयर का ठेका दे दिया गया, लेकिन अब सात महीने गुजर जाने के बाद भी काम लटका है।
हाईकोर्ट के आदेश पर अक्टूबर 2017 में शुरू हुई थी रिपेयर
वार्ड रूम, वॉशरूम, किचन और बाहर का एरिया तब टूटा
सात महीने बाद ईएसआईसी की टीम ने किया दौरा
ईएसआईसी की ओर से डीएचएस को अस्पताल की रिपेयर के लिए फंड देने के बाद सात महीनों में एक बार भी अस्पताल की हालत देखने का प्रयास नहीं किया। अगर ईएसआईसी के रीजनल डायरेक्टर सुनील तनेजा की ओर से फंड देने के बाद अस्पताल की रिपेयर के काम पर नजर रखी गई होती तो यह काम अब तक पूरा हो चुका होता। अस्पताल स्टाफ की ओर से बार बार बिल्डिंग की हालत को काम के योग्य न होना बताए जाने के बाद मंगलवार को ईएसआईसी के रीजनल ऑफिस चंडीगढ़ से एक टीम अस्पताल का दौरा करके गई। इस बारे में बात करने के लिए कंपनी के ठेकेदार जौंटी राय ने न फोन उठाया, न वो अस्पताल आ रहा है।
काम हो रहा है, हाईकोर्ट में 24 को देना है जवाब: एसएमओ
ईएसआई अस्पताल के एसएमओ डॉ. दर्शन सिंह का कहना है कि अस्पताल की हालत काफी खस्ता थी, जिस कारण रिपेयर का काम शुरू करवाया गया था। इसके लिए डीएचएस ईएसआई की ओर से प्राइवेट कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है। ठेकेदार की ओर से काम किया जा रहा है। इस बारे में 24 मई को हाईकाेर्ट में जवाब दे दिया जाएगा।
ईएसआईसी अस्पताल की हालत यह है कि ठेकेदार की ओर से रिपेयर शुरू करने के बाद अस्पताल के वार्ड रूम तोड़ दिए गए और फर्श पर टाइलें लगा कर उसे ऐसे ही छोड़ दिया गया है। वहां अभी बिजली की फिटिंग नहीं हुई है। इसके अलावा अस्पता के फर्स्ट फ्लोर और ग्राउंड फ्लोर पर बने वॉशरूम भी तोड़ कर ऐसे ही छोड़ दिए गए हैं। इस कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल की किचन भी तोड़ दी गई है। अब एक स्टोर रूम में खानापूर्ती के लिए किचन बनाई गई है।