मटौर थाने के अधीन इमिग्रेशन फ्रॉड का गोरखधंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा। जहां कुछ पीड़ित मात्र शिकायत दिए बिना अपने पैसे वापस लेने तक ही सीमित हैं, वहीं चार तीन पीड़ित ऐसे हैं जिन्होंने शिकायत के साथ-साथ पुलिस को आरोपी इमिग्रेशन कंपनी मालिक का मकान नंबर व पूरा पता तक बता दिया, लेकिन पुलिस फिर भी कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। अब यह पीड़ित एसएसपी कुलदीप सिंह चहल को शिकायत देने की बात कह रहे हैं।
पुलिस ने कहा था एड्रेस लाओ: गुरदासपुर से आए हरजिंदर सिंह ने बताया कि उसने सेक्टर-70 स्थित फेयर-वे कंसल्टेंट में कैनेडा जाने के लिए अप्लाई किया था। कंपनी प्रबंधक शैलेंद्र और अमनप्रीत ने उनसे सवा लाख रुपए ले लिए। यहां तक पासपोर्ट भी ले लिया। लेकिन जो समय दिया था उसमें उनको कैनेडा नहीं भेजा। वह आॅफिस आए तो वहां रिसेप्शन पर लड़कियां मिली। उन्होंने मालिक से मिलने ही नहीं दिया। वह कई बार गुरदासपुर से यहां मालिकों से मिलने के लिए आए। उसके बाद कंपनी पर ताला लगा दिया गया और उनको जो चेक दिए गए थे वह बाउंस हो गए। पुलिस को शिकायत देने पहुंचे तो कहा कि हमसे पूछ कर पैसे दिए थे। अब कंपनी संचालक भाग गए तो क्या करें। शिकायत ले ली, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं की। पुलिस का कहना है िक कार्रवाई की जा रही है।
बाउंस चेक के जरिये ढूंढ़ निकाला पता
मुकेरियां से आए दूसरे पीड़ित अशोक कुमार ने बताया कि इसी कंपनी ने उनसे 1 लाख 70 लेकर कैनेडा भेजना था। नहीं भेजा तो कंपनी ने उनको चेक दे दिए। उन्होंने निर्धारित डेट पर लगाए तो चेक बाउंस हो गए। कंपनी पर ताला जड़ा हुआ है। इस बाउंस चेक के माध्यम से पहले वह आईसीआईसीआई बैंक पहंुचे और वहां मैनेजर को गुजारिश करने के बाद उनको अकाउंट होल्डर का एड्रेस मिला। यह अकाउंट सेक्टर-47 के मकान नंबर- 3828 में किराए पर रहने वाले व्यक्ति का था। वे एड्रेस पर पहंुचे तो वहां उनको इमिग्रेशन मालिक शैलेंद्र मिल गया। लेकिन उसने पहचाने से साफ मना करते हुए दोनों को भगा दिया। अब वह उनके बारे में दोबारा से मटौर पुलिस स्टेशन में शिकायत देने आए। एड्रेस देने के बावजूद पुलिस ने अभी तक आरोपी को पकड़ा नहीं। एक पकड़ा जाएगा तो बाकी तीन पार्टनर्स का भी पता चल जाएगा।