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जमीन एक्वायर करने के लिए रखी मीटिंग का किसानों ने किया बाॅयकॉट, बोले-पहले किसानों के पिछले प्लॉट दो

गमाडा की ओर से एयरपोर्ट एरिया के जो 14 गांवों की करीब पांच हजार एकड़ जमीन एयरोट्रोपोलिस सिटी के लिए एक्वायर की जानी...

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 02:05 AM IST
गमाडा की ओर से एयरपोर्ट एरिया के जो 14 गांवों की करीब पांच हजार एकड़ जमीन एयरोट्रोपोलिस सिटी के लिए एक्वायर की जानी है, उसको लेकर सबसे पहले सोशल इम्पेक्ट एसेसमेंट (एसपीआई) करवाया जाना है। इस एसेसमेंट का विरोध किसान अंदोलन कमेटी कर रही है। उन्होंने गांवों में एसेसमेंट करने गई टीम को रोक दिया था, जिसके चलते मंगलवार को गमाडा के लैंड एक्वीजिशन आॅफिसर की ओर से किसानों के साथ बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में किसानों ने अधिकारियों से कहा कि वे तब तक एसेसमेंट नहीं होने देंगे, जब तक उनको पुरानी लैंड एक्विजिशन के प्लॉट्स आदी नहीं दिए जाते। करीब आधे घंटे तक चली बैठक में कुछ भी साफ नहीं हुआ है। अधिकारी व किसाना बिना नतीजा उठकर चले गए हैं।

लैंड एक्विजिशन के तहत नोटिफिकेशन जारी करे गमाडा: किसान अांदोलन कमेटी के सभी गांवों से संबंधित किसान बैठक में पहंुचे। इस मौके पर लैंड एक्वीजिशन कलेक्टर अरीना दुग्गल मौजूद थी। जरनैल सिंह, जगतार सिंह व बहाल सिंह किसानों को सबसे पहले गमाडा के तहसीलदार ने कहा कि वे एसेसमेंट का काम शुरू होने दें। किसानों ने कहा कि पहले गमाडा लैंड एक्वीजिशन एक्ट के तहत नोटिस जारी करे। उसके बाद जो मर्जी करवाए। साथ ही लैंड पूलिंग स्कीम को लेकर कमेटी बनाई जाए, जिसमें किसानों को शामिल किया जाए, ताकि किसानों को उचित हक मिल सके। पहले लैंड पूलिंग के तहत एक्वायर की गई जमीनों की तरह किसानों की हालत न हो। जो पहले लैंड पूलिंग के तहत जमीन एक्वायर हुई है, उनके प्लॉट्स किसानों को अभी तक नहीं मिले हैं और कई किसानों को तो पांच-पांच साल बाद मिल पाए हैं। यदि ऐसा ही इस बार भी होना है तो वे इसके लिए तैयार नहीं है।

प्लॉट देने के लिए साइज निर्धारित करें: किसान मक्खन सिंह, जतिंदर सिंह, गुरविंदर सिंह, भूपिंदर सिंह ने कहा कि लैंड पूलिंग के तहत रेजिडेंशियल व कमर्शियल प्लॉट्स कितना दिया जाएगा। इसका लिखित में सभी किसानों को दिया जाए। पहले की तरह न हो की बताया कुछ गया हो और जब प्लॉट देने का समय आता है तो बताए गए से कम साइज में प्लॉट दिए जाते हैं। यदि लैंड पूलिंग भी देनी है तो इसके लिए पहले पूरा खाका किसानों के साथ एक कमेटी बनाकर तैयार किया जाए। इस पर कोई सहमति नहीं हो सकी। जिस कारण पूरी मीटिंग बेनतीजा ही खत्म हो गई।

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