शहर में फ्रॉड इमिग्रेशन कंपनियों और बेराेजगार युवाओं को इंटरनेशनल एयरपोर्ट और सरकारी बैंकों में नौकरियां दिलाने के नाम पर ठगा जा रहा है। मीडिया मुद्दा उठाता है तो संबंधित पुलिस कार्रवाई के लिए पहंुच जाती है। सबकी आंखों में धूल झोंकने के लिए पीड़ित लोगों के सामने ठगी का धंधा करने वालों को थाने बुलाया जाता है। बाद में पीड़ितों को ही यह कहकर डराया जाता है कि केस होगा तो कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ेंगे। घर में समन पहुंचेंगे। इससे डरकर पीड़ित समझौता करने के लिए मान जाते हैं। यानी ठगों की दुकानदारी भी चलती रहती है और आवाज उठाने वाले पीड़ितों को कुछ पैसे वापस देकर चुप करा दिया जाता है। इमिग्रेशन कंपनियां फिर दूसरे लोगों को फंसाने में जुट जाती हैं। इसी तरह गत दिवस मटौर थाने के एसएचओ ने भी दिखावे के लिए इलाके की 25 इमिग्रेशन कंपनियों पर रेड की, लेकिन कार्रवाई किसी पर नहीं की। न किसी कंपनी के संचालक को पकड़ा गया और न ही स्टाफ को। बताया गया कि अिधकतर कंपनियों का स्टाफ ताला लगाकर फरार हो गया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब कंपनियां ताला लगाकर भाग ही गईं तो रेड कहां की। पुलिस की रेड की खबर देखकर इलाके की कई इमिग्रेशन कंपनियों से ठगी का शिकार हुए करीब 50 लोग शुक्रवार को मटौर थाने पहुंच गए। सभी ने पुलिस से कार्रवाई की मांग करते हुए हंगामा किया। इनमें से कोई आरोपी कंपनी पर कार्रवाई चाहता था तो कोई अपने पैसे वापस मांग रहा था।
कंपनी संचालक नाम बदल कर बैठे हैं शहर में: शहर में सैंकड़ों फ्रॉड कंपनियां है। बहुत कम कंपनियां ऐसी हैं, जिनके पास लाइसेंस है और पूरे दस्तावेज। इसके अलावा कहां-कहां ठगी की दुुकानदारी चल रही है, यह संबंधित पुलिस मुलाजिमों को भी पता है, लेकिन हर जगह सैटिंग हो जाती है। कार्रवाई न होने का दूसरा सबसे बड़ा कारण है कि पीड़ित लोग भी मात्र अपने पैसों तक ही सीमित रहते हैं। उनको कंपनी पर कार्रवाई करवाने से कोई लेनादेना नहीं। वह अपने पैसे वापस चाहते हैं। ऐसे मंे फिर पुलिस को भी दिक्कत आती है, क्योंकि पुलिस किसी के पैसे ऐसे वापिस नहीं करवा सकती।
एसएचओ बोले-शिकायत नहीं देते लोग: मटौर थाने के एसएचओ राजीव कुमार का कहना है कि फेज-3बी2 की कंपनी का स्टाफ पुलिस ने पकड़ा है। काफी पीड़ित लोग आए हुए थे, लेकिन शिकायत नहीं दी है। लोग मात्र शोर मचाते हैं लेकिन कार्रवाई के लिए शिकायत नहीं देते। कई बार पीड़ितों को कहा कि शिकायत दो, ताकि पुलिस केस दर्ज करे।
न किसी कंपनी संचालक को पकड़ा, न स्टाफ को
20 हजार में पहुंचो कैनेडा
फेज-3बी2 के एससीएफ-16 के टॉप फ्लोर पर स्थित बेस्ट सर्विस ऑफ सेक्सेस में शुक्रवार को ठगी के दर्जनों पीड़ित लाेग पहंुचे। आॅफिस के स्टाफ में सिर्फ युवतियां मिलीं। उन्होंने पीड़ितों को वहां से वापस भेज दिया। इसके बाद सभी लोग इकट्ठे होकर मटौर थाने पहुंचे। सिसवां से आई महिला सुरिंदर कौर ने बताया कि उनका 28 जनवरी को वीजा लगवाया गया और 30 हजार रुपए लिए गए कैनेडा भेजने के लिए। लेकिन वह जाली था। अमृतसर से आए बलजिंदर सिंह ने बताया कि 30 हजार लिए और जब पहले दिन वे इनके आॅफिस गए तो इन्होंने कहा कि मात्र 20 हजार दे दो। आपको कैनेडा भिजवा देंगे। वहां शुरू में 1800 डॉलर मिलेंगे। वहां जाकर सैलरी में से कंपनी को बाकी पैसे देना। बलजिंदर ने बताया कि उनको वीजा दिया, वह जाली नकली था। उन्हें एयरपोर्ट से वापस आना पड़ा। इसी तरह पीड़ित मनप्रीत सिंह को दुबई का जाली वीजा दे दिया। ऐसे ही करीब 40 पीड़ित लोग पहुंचे हुए थे। इसी तरह सेक्टर-70 की कंपनी फेयर-वे कंसल्टेंट एससीओ- 537 के खिलाफ मटौर पुलिस स्टेशन में कई लोग ठगी की शिकायत लेकर पहुंचे हुए थे। कई लोगों ने लाखों की ठगी के आरोप लगाए।