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ईएसआई अस्पताल में रात को गुल थी लाइट, खड़ी एंबुलेंस को लगा जंग, इमरजेंसी में आए मरीज को डॉक्टर ने अपनी गाड़ी में पहुंचाया जीएमसीएच

3 वर्ष पहले
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मोहित शंकर|मोहाली mohit.shanker@dhrsl.com

मोहाली की कंपनियों में काम करने वाले करीब 2 लाख कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए इंडस्ट्रियल एरिया फेज-7 में बने ईएसआईसी अस्पताल की हालत खस्ता होने और सुविधाओं की कमी का खामियाजा एक मरीज को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ सकता था। सोमवार रात करीब 8 बजे इंडस्ट्रियल एरिया फेज-7 की एक फैक्ट्री में काम करने वाले युवक को केमिकल की गैस चढ़ गई, जिस कारण वह बेहोश हो गया। अन्य कर्मचारी उसे ईएसआईसी अस्पताल ले गए। जब मरीज को अस्पताल पहुंचाया गया, उस समय अस्पताल में लाइट नहीं थी।डॉक्टर अंधेरे में मरीज को इलाज नहीं दे पाए। मरीज को किसी अन्य अस्पताल में रेफर करने के लिए अस्पताल में एंबुलेंस भी नहीं थी, जबकि मरीज की सांसें उखड़ने लगी और उसकी हालत बिगड़ने लगी। इसे देखते हुए अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉ. मनोहर सिंह ने मरीज काे तुरंत अपनी गाड़ी में डाला और वो खुद उसे लेकर जीएमसीएच 32 पहुंच गए, जहां मरीज का समय रहते इलाज करवाया गया।

स्टेनलेस स्टील टैंक साफ करते हुए चढ़ गई केमिकल गैस: 32 साल के सुनील राजक सोमवार रात करीब 8 बजे इंडस्ट्रियल एरिया फेज-7 की फैक्ट्री में काम कर रहा था। जब सुनील फैक्ट्री में मौजूद स्टेनलेस स्टील का टैंक एक केमिकल जेल से साफ कर रहा था तो अचानक उसे केमिकल की गैस चढ़ गई और वो बेहोश हो गया। साथी कर्मचारी उसे ईएसआईसी अस्पताल ले गए थे।

न प्रॉपर इंफ्रास्ट्रक्चर, न लाइट, एंबुलेंस भी खस्ताहाल: ईएसआईसी अस्पताल में सुविधाओं की कमी के कारण मरीज की जान पर बन आई थी। जब मरीज को अस्पताल ले जाया गया तो वहां रात के समय लाइट नहीं थी। जिस कारण मरीज का इलाज कर पाना मुश्किल था। ऊपर से अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस भी काफी सालों से न चलने के कारण और खड़ी रहने के कारण खस्ताहाल थी, जिस कारण मरीज को इमरजेंसी में रेफर करने में भी समस्या आ रही थी।

10 साल से खड़ी है एंबुलेंस, पहले डीजल नहीं मिला, अब ड्राइवर नहीं

मोहाली इंडस्ट्री एसोसिएशन के लेबर लॉ कमेटी के चेयरमैन एडवोकेट जसबीर सिंह ने बताया कि ईएसआईसी अस्पताल में एम्बुलेंस तो है, लेकिन अस्पताल के पास ड्राइवर नहीं है। उन्होंने बताया कि करीब दस साल पहले अस्पताल को एंबुलेंस तो मिल गई थी, लेकिन तब फंड्स की कमी के कारण एम्बुलेंस को डीजल नहीं मिलता था, जिस कारण एंबुलेंस नहीं चलती और अब अस्पताल के पास कोई ड्राइवर नहीं है, इसलिए एम्बुलेंस को 10 साल से खड़े-खड़े जंग लग गई है।

सोमवार रात पेशेंट इमरजेंसी में आया था। केमिकल की गैस चढ़ने से मरीज बेहोश हो गया था और उसकी सांस उखड़ रही थी। मरीज को रेफर करना था, लेकिन एंबुलेंस नहीं थी और मरीज की हालत बिगड़ रही थी। उसे अपनी गाड़ी में डालकर तुरंत जीएमसीएच 32 पहुंचाया, जहां उसे तुरंत इलाज दिलवाया गया। डॉ. मनोहर सिंह, ईएसआईसी मोहाली

अस्पताल के पास एं्बुलेंस तो है, लेकिन ड्राइवर न होने के कारण ऐसे ही खड़ी है। एंबुलेंस के लिए ईएसआईसी के रीजनल आॅफिस चंडीगढ़ काे लिखा जा चुका है। लेकिन अभी तक एंबुलेंस का ड्राइवर नहीं मिल पाया है। डॉ. दर्शन सिंह, एसएमओ ईएसआईसी मोहाली

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