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जनप्रतिनिधियों का दर्द नहीं सुन रहे अफसर बार-बार मुद्दे उठाने के बावजूद समाधान नहीं

3 वर्ष पहले
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आमजन से जुड़े मुद्दों और समस्याओं को मंच के माध्यम से शीघ्र समाधान के लिए आयोजित होने वाली पंचायत समिति की बैठकें महज औपचारिकता बन कर रह गई है। बैठकों में जनप्रतिनिधियों की ओर से उठाए गए मुद्दों का समय पर निस्तारण नहीं हो रहा है। इस पर ये बैठकें महज खानापूर्ति साबित हो रही है। उल्लेखनीय है कि पंचायत समिति की बैठकों में जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं का मुद्दा उठाते है और मौजूद अधिकारियों को समस्या समाधान को लेकर निर्देश भी दिए जाते है, लेकिन अधिकारी है कि बैठक के बाद इन मुद्दों काे फाइल में ही कैद कर बैठ जाते है। नतीजतन बैठकों में उठाए गए अधिकांश मुद्दे सिर्फ मुद्दे ही रहते है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों का अब बैठकों में आने में रूचि नहीं ले रहे है। इनकी पीड़ा है कि जब बैठकों में रखने वाली समस्याओं के समाधान को लेकर अधिकारी प्रयास ही नहीं करते हैं तो बैठक में आने का क्या औचित्य।

अनसुलझी समस्याओं पर एक नजर

पंचायत समिति सदस्य भगवानाराम माली ने बताया कि पूर्व में उसने पंचायत समिति मीटिंग में मायलावास गांव में पुराने लोहे के जर्जर खंभे को हटाने,मोतीसरा रोड की तरफ वॉल्टेज की समस्या, मायलावास की बिजली सप्लाई राखी जीएसएस से नहीं करके मोकलसर से सुचारू करने की मांग रखी, लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। पंचायत समिति सदस्य गणपतसिंह भायल तेलवाड़ा ने मांग बताया कि सरकार ने लाखों रुपए खर्च कर श्मशान भूमि एवं आबादी क्षेत्र में बनी जीएलआर में पानी का कनेक्शन करने, पंचायत समिति सदस्य नवाराम माली ने मिठोड़ा में जीएलआर निर्माण, पंचायत समिति सदस्य पुखराज ने कुसीप के गोसरिया में निर्मित जीएलआर में पानी कनेक्शन करने,पंचायत समिति सदस्य गणपतराज ने कब्रिस्तान में जीएलआर स्वीकृत के बावजूद कार्य शुरू नहीं होने की मांग रखी। बैठक हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन कोई भी अधिकारी समाधान को लेकर प्रयास तक करता नजर नहीं आया। नतीजतन समस्या आज भी मुंह बाएं खड़ी है। इसके अलावा सिवाना के वार्ड 18,20 एवं 24 में नाली निर्माण, वार्ड 17 में सीसी या खरंजा निर्माण, तेलवाड़ा ग्रेवल सड़कों के निर्माण की मांग पर अधिकारियों ने समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन अभी तक हालात वही है। ऐसे में अब अधिकारियों की कार्यप्रणाली से विश्वास उठने लगा है।

अधिकारी जनता के सेवक की तरह कार्य नहींं कर रहे हैं। कोई भी मुद्दा हो वे गोलमोल जबाव ही देते हैं। किसी भी समस्या के समाधान के बारे में पूछने पर बात टाल दी जाती है। - भगवानाराम माली, पंचायत समिति सदस्य

बैठकों में जनप्रतिनिधियों की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों का समय पर समाधान नहीं हो रहा है। जनता के काम समय पर नहीं होते फिर ऐसी बैठकों का क्या मतलब। - गणपतसिंह भायल, पंचायत समिति सदस्य

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