जिले में दौरा कर रहे प्रभारी मंत्री पारस जैन शुक्रवार सुबह 11.30 बजे अचानक मूंदी उपमंडी पहुंच गए। वे सीधे ई-उपार्जन केंद्र पहुंचे। चना उपज का तौल शुरू नहीं होने पर नाराजी जताते हुए सहकारिता निरीक्षक को तलब किया। इस बीच किसानों ने मंत्री को बताया कि उपज तौल में तीन दिन लग रहे हैं। इस पर मंत्री ने निरीक्षक से कहा सुबह 9 बजे तौल शुरू हो जाना चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो आपको सस्पेंड कर दिया जाएगा।
मूंदी उपमंडी में वाहनों के सायरन गूंजते ही कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। मंत्री ने मंडी का निरीक्षण कर सहकारिता निरीक्षक जीएल वर्मा से समर्थन मूल्य पर हो चुकी खरीदी की जानकारी ली। किसानों ने तुलाई में विलंब सहित अन्य समस्याएं बताई। प्रभारी मंत्री ने एसडीएम अरविंद चौहान से कहा किसानों की समस्याएं हल करवाएं। जो कर्मचारी लापरवाही बरते उन पर कार्रवाई की जाए। केंद्र पर पर्याप्त बारदान उपलब्ध कराकर किसानों की उपज जल्द तौल करने के निर्देश भी दिए। कोदबार के किसान राजेंद्र राजपूत ने मंत्री से पूछा कि चने का भुगतान कब तक हो जाएगा। इस पर उन्होंने कहा 20 दिन तो लगेंगे। मंत्री करीब आधा घंटा मंडी में रहे। उनके जाने के बाद कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। निरीक्षण के दौरान विधायक लोकेंद्रसिंह तोमर भी मंत्री के साथ थे।
मूंदी उपार्जन कंेद्र पर प्रभारी मंत्री पारस जैन ने औचक निरीक्षण किया।
परिवहन नहीं होने से बढ़ रहा स्टाक
उपार्जन केंद्र पर खरीदे गए चने का स्टाक बढ़ता जा रहा है। उपमंडी के प्लेटफार्म भर चुके हैं। परिवहन नहीं होने से किसानों को उपज रखने की जगह नहीं मिल रही है। करीब 5 हजार क्विंटल चना स्टाक होना बताया जा रहा है।
स्टाक में से एक कट्टी का तौल कराया
प्रभारी मंत्री जैन ने निरीक्षण के दौरान एक हम्माल से पूछा दो दिन पहले खरीदे गए चने का स्टाक कहां हैं। हम्माल उन्हें मंडी के प्लेटफार्म तक ले गया। मंत्री ने कहा इसमें से एक कट्टे की तुलाई मेरे सामने करो। हम्माल ने कट्टी उठाकर कांटे पर रखी। इसका वजन 50 किलो 600 ग्राम निकला। 600 ग्राम अतिरिक्त वजन बारदान का बताया गया। इस पर मंत्री ने हम्माल की पीठ थपथपाई।
प्रभारी मंत्री ने रोहणी ग्रिड का किया भूमिपूजन
ठेकेदार ने तीन माह में बना दी ग्रिड तो विधायक से कराएंगे सम्मान
ग्राम रोहणी में प्रभारी मंत्री ने ग्रिड निर्माण का भूमिपूजन किया।
जावर | जिले के प्रभारी मंत्री पारस जैन ने शुक्रवार को जावर डीसी क्षेत्र के ग्राम रोहणी में 33/11 केवी ग्रिड निर्माण का भूमिपूजन किया। ठेकेदार से काम जल्दी कराने के लिए उन्होंने कहा वैसे तो निर्माण के लिए छह माह का समय है लेकिन ठेकेदार तीन माह में काम पूरा कर देता है तो विधायक देवेंद्र वर्मा एक कार्यक्रम आयोजित कर उनका सम्मान करेंगे। मैं विधायक देवेंद्र वर्मा से यह अपेक्षा करता हूं। मंत्री जैन ने शिलान्यास पत्थर से कपड़ा हटाया तो वह टूटा हुआ था। दो लोग पत्थर पकड़े हुए थे।
रोहणी ग्रिड बनने से फाल्ट से मिलेगी निजात
जावर डीसी में 5 उपकेंद्र (ग्रिड) हैं। इनसे 65 गांव जुड़े हैं। गांव अधिक होने से लोड भी ज्यादा है। इस कारण अकसर लाइन फाल्ट हो जाती है। किसी भी गांव में फाल्ट होने पर सभी 65 गांव को बिजली बंद कर दी जाती है। इससे ग्रामीणों को बड़ी दिक्कत होती थी। रोहणी ग्रिड बनने से छह गांवों का लोड इस पर आ जाएगा। फाल्ट समस्या से भी निजात मिलेगी। ग्रामीणों ने प्रभारी मंत्री को बिजली कंपनी की मनमानी की लिखित शिकायत की। कोमल पांचाल ने बताया जो बिजली चोरी कर रहे हैं उन पर केस बनाया जाए। लेकिन बिजली कंपनी कर्मचारी चेकिंग के नाम पर जबरन ओवर लोड बनाकर बिल की राशि बढ़ा देते हैं। जबकि अधिकांश घरों में एलईडी व सीएफएल के उपयोग से खपत कम चुकी है। कर्मचारियों पर लगाम लगाई जाए।
इधर, एक भी प्रभारी मंत्री यहां नहीं आए
प्रभारी मंत्रीजी! किल्लौद भी खंडवा जिले में शामिल है, कभी इधर भी आइए...
भास्कर संवाददाता | किल्लौद
प्रदेश के ऊर्जा व खंडवा जिले के प्रभारी मंत्री पारस जैन तीन दिन के प्रवास पर हैं। वे दो दिन से मांधाता विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं। विधायक व अफसरों ने शायद उन्हें बताया ही नहीं कि किल्लौद भी खंडवा जिले और मांधाता विधानसभा का हिस्सा है। दूरस्थ ब्लाक होने से मंत्री-अफसर यहां आने से कतराते हैं। वैसे भी भाजपा सरकार के 14 साल के कार्यकाल में एक भी प्रभारी मंत्री ने ब्लाक का रुख नहीं किया। ब्लाक के ग्रामीण निराश तो हैं लेकिन फिर भी वे मंत्री जैन से आग्रह कर रहे हैं कि कभी इधर भी आकर हमारी समस्याएं सुन लीजिए।
शिवराज सरकार के तीनों कार्यकाल में करीब आधा दर्जन प्रभारी मंत्रियों को जिले का प्रभार दिया गया। वर्तमान प्रभारी मंत्री पारस जैन नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान ब्लाक से 12 किमी दूर खिरकिया तक आकर ही खंडवा निकल गए थे। ग्रामीणों का कहना है प्रभारी मंत्री यदि ब्लाक का दौरा करें तो ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण होने के साथ योजनाओं को गति मिल सकती है। इंदिरा सागर की डूब से उपजा यह ब्लाक अब तक मूलभूत जरूरतों को तरस रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रभारी मंत्रियों को ब्लाक में रात बिताने के निर्देश के बावजूद किल्लौद की उपेक्षा से ग्रामीण निराश हैं। हालांकि ब्लाक के जनप्रतिनिधियों की अरुचि इसका प्रमुख कारण है।
यह हैं प्रमुख समस्याएं - ब्लाक मुख्यालय बनने के बाद से कई शासकीय कार्यालयों का अभाव है। पूरा ब्लाक पेयजल संकट से जूझ रहा है। ब्लाक में एक भी मंडी नहीं होने से किसानों को 15 किमी दूर खिरकिया या 45 किमी दूर हरसूद जाना पड़ रहा है। यही स्थिति डीजल-पेट्रोल को लेकर है। मुख्यालय को खंडवा मार्ग से जोड़ने के लिए बायपास का निर्माण भी अधर में है। एनएचडीसी द्वारा बनाई गई सड़कें ध्वस्त हो चुकी हैं। एक भी राष्ट्रीयकृत बैंक नहीं है।