श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के लिए बाल कृष्ण को पंडाल ले जाया गया।
मूंदी | अपने पिता द्वारा दिए वचन का पालन करने के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने 14 साल नंगे पैर वनवास भोगा। यह त्याग तो भगवान ही कर सकते हैं। आज की पीढ़ी त्याग तो छोड़ बड़ों का आदर भी करना भूल गई है। उनका अधिकांश समय मोबाइल और सैर-सपाटे में बीत रहा है। यह परिवार और खुद युवाओं के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
नगर में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन पं. नटवर शास्त्री ने युवाओं को सीख देते हुए अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा जीवन में सुख-समृद्धि केवल धन-दौलत से नहीं आती। इसके लिए राम नाम का जप भी आवश्यक है। मन में दया भाव है तो आपसे कभी पाप नहीं हो सकता। असत्य कुछ दिन अच्छा लगता है मगर जीत सत्य की ही होती है। उन्होंने कहा घर में मंदिर एकांत में होना चाहिए। घर में मतभेद रखें लेकिन मन भेद नहीं होना चाहिए। कथा के दौरान शाम 5 बजे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। बालक मुकुंदा राजेश सोनी को श्रीकृष्ण के रूप में सजाकर पंडाल लाया गया। जयकारों के बीच माखन-मिश्री की प्रसादी वितरित की गई।