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सेवानिवृत्त शिक्षक के जुनून से बना नाग मंदिर, 20 से कथा

3 वर्ष पहले
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जिस कच्चे ओटले पर नगर व आसपास के लोग नाग पंचमी पर नाग देवता (श्याम सिंह बाबा) के दर्शन करने जाते थे, एक सेवानिवृत्त शिक्षक के जुनून से वहां पक्का मंदिर तैयार हो चुका है। उन्होंने दो साल में यह काम कर दिखाया। मंदिर के लिए राशि एकत्रित करने की शुरुआत स्वयं 51 हजार रुपए देकर की। इस राशि से उन्होंने निर्माण सामग्री लाकर रख दी। इसके बाद नगर के लोग भी इस मुहिम से जुड़ते गए। दो साल में ही 10 लाख रुपए निर्माण पर खर्च किए जा चुके हैं। सिर्फ गुंबद व रंग-रोगन का काम शेष है। शिक्षक द्वारा 20 अप्रैल से मंदिर परिसर में भागवत कथा का आयोजन कराया जा रहा है।

मंदिर निर्माण के लिए अनुकरणीय पहल करने वाले यह सेवानिवृत्त शिक्षक हैं सुरेंद्र कोठारी। दो साल पहले वे नगर से बाहर खेत में बने बाबा के ओटले पर दर्शन करने गए थे। तभी मन में आया कि ओटले की जगह पक्के मंदिर निर्माण होना चाहिए। उन्होंने निर्णय कर लिया कि इसकी शुरुआत मैं ही करूंगा। कुछ लोगों ने चर्चा कर सबसे पहले 51 हजार रुपए देकर सीमेंट, लोहा लाकर रखा गया। भास्कर ने उनकी इस पहल को सार्थक रूप दिया। खबर प्रकाशन के बाद लोग उनके साथ जुड़े। दो साल में 10 लाख रुपए मंदिर निर्माण पर खर्च हो चुके हैं। इसमें कोठारी ने स्वयं करीब दो लाख रुपए खर्च किए हैं। कुछ लोगों ने निर्माण सामग्री दान की तो कुछ ने नकद सहयोग दिया। फिलहाल मंदिर की बाहरी दीवारों का पलस्तर अंतिम चरण में है। गुंबद व रंगरोगन का काम शेष है। कोठारी परिवार अब 20 अप्रैल से यहां भागवत कथा का आयोजन कर रहा है। पं. बनवारी उपमन्यु संगीतमय कथा वाचन करेंगे।

स्वयं दो लाख खर्च किए, 7 लाख का सहयोग नगर के लोगों ने दिया, गुंबद का काम शेष

नाग मंदिर का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है।

कांक्रीट पुलिया की मांग

खेत में बने मंदिर तक जाने के लिए पहले ग्रामीणों को नाले के पानी से होकर निकलना पड़ता था। दो साल पहले युवाओं ने पहल कर नाले में सीमेंट पोल लगाकर रास्ता तैयार किया। शैलेंद्र महोदय ने बताया नगर के लोगों के सहयोग से मंदिर का निर्माण अंतिम चरण में है। अब विधायक व नगर परिषद को नाले पर कांक्रीट पुल का निर्माण करा दे तो श्रद्धालुओं की यह समस्या भी हल हो जाएगी। क्योंकि नाग पंचमी बारिश के समय आती है और इस समय नाले में ज्यादा पानी रहता है। इस दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

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