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शहर की एक तिहाई आबादी को पिला रहे अमानक पानी, जांच में अमानक साबित हो रहे सैंपल

3 वर्ष पहले
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गर्मी बढ़ते ही शहर में कथित मिनरल वाटर की मांग बढ़ी, कॉम्पटीशन के फेर में इसकी शुद्धता पर ध्यान नहीं

भास्कर संवाददाता | मुरैना

मिनरल वाटर के नाम पर शहर की एक तिहाई आबादी को अमानक पानी परोसा जा रहा है। गर्मी बढ़ते ही पानी की आपूर्ति में और इजाफा हुआ है। अशुद्ध पानी के सेवन के कारण लोगों को टाइफाइड व अमीबायसिस रोग हो रहे हैं। इस मामले में पानी के सैंपल अमानक पाए जाने के बाद भी नगर निगम कार्रवाई से पीछे है।

शहर में इस समय 12 से अधिक पानी आपूर्ति करने वाली कंपनियां काम कर रही हैं। तापमान बढ़ते ही शुद्ध पानी की मांग बढ़ गई है। सर्दियों में जहां 20 से 25 हजार लीटर पानी की खपत प्रतिदिन रहती है वहां गर्मियों में इसकी मांग व आपूर्ति बढ़कर 50 हजार लीटर तक पहुंच जाती है। जो वाटर सप्लायर पुराने हैं वे प्रतिदिन 12 से 14 हजार लीटर पानी की आपूर्ति अपने ग्राहकों को कर रहे हैं। जिनका कारोबार तीन से चार साल पुराना है वे प्रतिदिन सात से आठ हजार लीटर पानी बेच रहे हैं। इस प्रकार शहर के लोगों को कई कारोबारी अमानक पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। पानी मानक है या अमानक इसकी पुष्टि, खाद्य सुरक्षा विभाग की टेस्टिंग लैब रिपोर्ट से होती है। हाल ही में अंबाह की पैकेज ड्रिंकिंग वाटर रिपोर्ट मिस ब्रांड आई है। इस रिपोर्ट को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग, एडीएम कोर्ट में अभियोजन की कार्रवाई कर रहा है। इससे पहले मुरैना की दो व सबलगढ़ की एक कंपनी का पानी, जांच में अमानक पाया गया। जिसके खिलाफ अभियोजन सीजेएम कोर्ट व एडीएम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

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