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अक्षय तृतीया आज दर्जनों सामूहिक विवाह सम्मेलन होंगे, बाल विवाह रोकने की तैयारी नहीं
निरंकारी भवन के पास अक्षय तृतीया पर होने वाली शादी में उस समय खलल पड़ गया जब अधिकारियों के सामने दुल्हन के नाबालिग होने का सबूत आया। यह सबूत दूल्हे के परिजन ने पेश तो शादी में डीजे बजाने की अनुमति लेने की मंशा से किया था लेकिन यह ब्याह रूकने का कारण बन गया। यह कार्रवाई एसडीएम उमेश शुक्ला ने मंगलवार की दोपहर की लेकिन देर शाम तक वह इस मामले को छुपाते रहे। कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार के हस्तक्षेप पर उन्होंने मामले का खुलासा किया।
जानकारी के अनुसार सोनू आर्य नामक युवक का विवाह अक्षय तृतीया पर 18 अप्रैल को होना था। एसडीएम उमेश शुक्ला ने बताया कि सोनू के परिजन निरंकारी भवन के पास शादी सम्पन्न करा रहे थे। डीजे बजाने की अनुमति के लिए आए तो उनसे दूल्हा-दुल्हन के आयु प्रमाण-पत्र मांगे। डॉक्यूमेंट के अवलोकन पर पता चला कि जिस लड़की वर्षा से सोनू की शादी हो रही थी उसकी जन्मतिथि आधारकार्ड में 10 जून 2000 है। जन्मतिथि के अनुसार लड़की अभी नाबालिग थी।
एसडीएम ने बताया कि लड़की नाबालिग है इसलिए महिला बाल विकास को इस संबंध में लिखा है और संबंधित थाने को भी अवगत करा दिया गया है ताकि नाबालिग की शादी न हो।
दूल्हे के घरवालों ने शादी में डीजे बजाने की अनुमति मांगी, आवेदन के साथ लगे प्रमाण पत्र में नाबालिग थी दुल्हन, अब अफसर रुकवाएंगे बाल विवाह
देर शाम तक केस को छिपाते रहे एसडीएम, पूछने पर बताया-बाबू ग्वालियर रहते हैं, मुझे दुल्हा-दुल्हन के नाम याद नहीं
एसडीएम बोले-बाल विवाह से संबंधित कई आवेदन आए हैं, कैसे बताऊं नाम: एसडीएम उमेश शुक्ला से दोपहर के समय हुई उक्त कार्रवाई के संबंध में शाम 6.18 बजे जानकारी चाही तो उन्होंने कहा कि डीजे की अनुमति के कई आवेदन उनके पास आए थे। उनसे कहा गया कि जिसमें बाल विवाह की पुष्टि हुई है। उसके बारे में जानकारी चाहिए तो उनका जवाब था कि आज ऐसे भी कई आवेदन आए जिनमें बाल विवाह की पुष्टि हुई। एसडीएम शुक्ला से इन सभी के नाम पूछे गए तो वह बोले आप इस समय जानकारी मांग रहे हैं। मुझे खुद का नाम याद नहीं रहता तो उनके कैसे बताऊं। यह पूछने पर कि ऑफिस के बाबू या अन्य कर्मचारी यह जानकारी दे सकते हैं तो एसडीएम ने कहा कि सभी ग्वालियर रहते हैं और फोन कट कर दिया। बाद में कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार के हस्तक्षेप पर एसडीएम ने दैनिक भास्कर को जानकारी से अवगत कराया।
इस साल नहीं है तैयारियां
बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन ने गाइड़ लाइन तय की थी कि मंगल परिणय के दौरान पंडित/आचार्य को वर-वधु में से कोई भी नाबालिग नजर आता है फेरों की रस्म पूरी नहीं कराए। साथ ही बैंड-बाजे व अन्य तैयारियां भी की गई थीं लेकिन इस बार अफसरों की ऐसी कोई तैयारी नहीं है। यहां बता दें कि अक्षय तृतीया पर अक्सर बाल विवाह के केस सामने आते हैं।
घर पर थे महिला बाल विकास के अफसर
अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें आमजन से भी सहयोग की अपील हो रही है। ऐसे समय में महिला बाल विकास के जिला कार्यक्रम अधिकारी गौतम अधिकारी व शहरी परियोजना के सीडीपीओ मनीष सिंह छुट्टी लेकर चले गए। समझा जा रहा है इन अधिकारियों ने इसलिए छुट्टी ली है ताकि बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करना पड़े।