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पुलिस व प्रशासन के पास नहींं गोताखोर इमरजेंसी में बुलाते ग्रामीण तैराकों को

3 वर्ष पहले
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जिला पुलिस बल व होमगार्ड के जवानों के बीच एक भी सिपाही, हवलदार गोताखोर नहीं है। पानी में डूबे लोगों को बचाने के लिए पुलिस व प्रशासन को प्राइवेट गोताखोरों की मदद लेना पड़ती है। यह स्थिति जिला प्रशासन के आपदा प्रबंधन की हकीकत जाहिर करती है।

आलम यह है कि नहर व नदी में नहाने के दौरान लोग पानी में बह जाते हैं। ऐसे लोगों को बहते पानी में तलाशने के लिए पुलिस के पास गोताखोर उपलब्ध नही होते। तब पुलिस को मल्लाहों को बुलाकर आपातकालीन सेवाएं लेना पड़ती हैं। अव्यवस्थाओं के आलम में 48 घंटे तक पानी में डूबे लोगों का पता नहीं चलता है। होमगार्ड के सैनिकों को घटनास्थल पर बुलाने के बाद भी वह मददगार साबित नहीं होते। वस्तुस्थिति यह है कि जिला पुलिस में 1400 कर्मचारियों के बीच एक भी कर्मचारी गोताखोर व तैराक नहीं है। कुछ सिपाहियों को तैराकी आती भी है तो वह बेगार करने से बचते हैं ।होमगार्ड में इस समय 150 जवानों का बल है। लेकिन उनके बीच में तीन या चार जवान ही ठीक से तैरना जानते हैं।

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