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478 में से एक भी पंचायत नहीं हुई कुपोषण मुक्त

3 वर्ष पहले
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महिला बाल विकास विभाग की अनूठी पहल का लाभ जिले के किसी सरपंच को नहीं मिल सका

भास्कर संवाददाता | मुरैना

एक साल के प्रयासों के बाद भी जिले की 478 ग्राम पंचायतों में से एक भी पंचायत कुपोषण मुक्त नहीं हुई। इसके चलते 2018 में किसी भी पंचायत को 5000 रु का पुरस्कार नहीं मिल सकेगा। कारण है कि अति कम वजन के बच्चों का मानकों के अनुरूप वजन नहीं बढ़ सका है।

अधिकतम वजन के बच्चों का वजन उनकी आयु के अनुसार बढ़ जाए उसके लिए ग्राम पंचायतों के सरपंच व सचिव को अपनी मॉनीटरिंग बढ़ाकर महिला बाल विकास विभाग के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर फोकस करना थी। इस तारतम्य में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह से लेकर हर तीन महीने के अंतराल से क्रियान्वित किए जाने वाले सुपोषण अभियान का लाभ कुपोषित बच्चों को दिलाया जाना था लेकिन यह प्रयास रंग नहीं ला सके। कारण है कि अति कम वजन के बच्चों को वजन वृद्धि के लिए पोषण पुनर्वास केन्द्रों तक नहीं पहुंचाया जा सका।

इस प्रकार होना था सम्मान

ग्राम पंचायत के कुपोषण मुक्त होने पर शासन सरपंच को नकद 2100 रुपए, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से लेकर पर्यवेक्षक, सहायिका, आशा, पंचायत सचिव व एएनएम को उनके कार्य की उत्कृष्टता के आधार पर 1100 रु के पुरस्कार से सम्मानित किया जाना था । लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं आने पर उक्त पुरस्कार से कोई सरपंच या स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी लाभान्वित नहीं हो सके।

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