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‘आराध्य’ का जीवन बचाने ‘ज्येष्ठा’ ने तोड़ी गुल्लक

3 वर्ष पहले
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जिंदगी-मौत के बीच झूल रहे आराध्य की हालत देखकर आठ वर्षीय ज्येष्ठा का कलेजा पसीजा है। दैनिक भास्कर में छपी खबर पढ़ने के बाद ज्येष्ठा ने घर में रखी अपनी उस गुल्लक को तोड दिया जिसमें वह अपने माता-पिता से पैसे लेकर जमा करती है। गुल्लक तोडकर ज्येष्ठा ने अपने पिता तेजेंद्र खेडा से कहा कि इस पैसे को वह आराध्य को दे आएं ताकि उसका बोन मेरो बदल जाए। नन्ही उम्र में बेटी का समर्पण देखकर वह उसे लेकर नेकी की दीवार टीम के पास पहुंचे तो टीम इस बिटिया को साथ लेकर शहर में सहायता मांगने निकल गई।

केशव कालोनी में रहने वाले पवन कुमार शर्मा के चार वर्षीय बेटे आराध्य का ब्लड में इन्फेक्शन है। कीमो थैरेपी के सहारे जीवित इस बेटे का बोन मैरो बदलना है। जिसके लिए 35लाख रुपए की आवश्यकता है। परिवार के पास इतना पैसा नहीं है। इसलिए नेकी की दीवार ने आराध्य का जीवन बचाने अभियान छेड़ दिया है।

पहल

4 साल के मासूम के बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए मदद जुटाने मासूम बच्ची ने की पहल तो आगे आए समाजसेवी

खुद की गुल्लक फोड़ने के बाद पिता के साथ सड़क पर उतरी श्रेष्ठा।

मासूम के लिए रुपए जुटाने रोज चलेगा अभियान

नेकी की दीवार टीम ने अपील की है कि लोग आराध्य की मदद करने के लिए राशि नेकी की दीवार जन सेवा समिति के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया एमएस रोड मुरैना के खाता नंबर 3667583516 व आईएफएससी कोड नं. सीबीआईएन0280781 में जमा करा सकते हैं। इसके अलावा टीम अब हर रोज शहर में निकलेगी और हर घर व दुकान पर जाकर लोगों से सहयोग मांगेगी। ज्येष्ठा भी इस टीम के साथ मौजूद रहेगी। गुरुवार को यह टीम सदर बाजार इलाके में जाकर मदद मांगेगी।

इधर...अंबाह से भी मिली 45 हजार की मदद

आराध्य का जीवन बचाने छोटे-छोटे सहयोग से बडी मदद जुटाने की मुहिम चल पड़ी है। अंबाह में क्लीन-ग्रीन टीम ने शहर से 9 हजार रुपए की राशि जमा की इसके अलावा अंबाह के अन्य समाजसेवियों में से एक ने 21 हजार रुपए एक ने 11हजार रुपए की राशि दी। अंबाह से तकरीबन 45 हजार रुपए की मदद आराध्य के पिता पवन शर्मा पर पहुंची है लेकिन यह मदद अभी काफी कम है। इसलिए अपील की गई है कि हर व्यक्ति इसमें मदद प्रदान करे।

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