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पांच दिन से सरसों व गेहूं की खरीद नहीं होने से किसानों ने मंडी में किया हंगामा

3 वर्ष पहले
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कर्मचारी पैसा लेकर ऐसे व्यापारियों से फसल खरीद रहे हैं, जो पूर्व में सस्ती दर पर खरीद कर चुकें हैं

भास्कर संवाददाता | जौरा

कृषि उपज मंडी में मार्केटिंग सोसायटी पर तैनात कर्मचारी पैसा लेकर ऐसे व्यापरियों का गेहूं व सरसों खरीद रहे हैं, जो किसानों को नगद पैसा देकर पूर्व में उनका गल्ला खरीद चुके हैं। मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में यह व्यापारी न केवल शासन द्वारा निर्धारित खरीद प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि वे किसानों को मिलने वाले समर्थन मूल्य का अनुचित लाभ ले रहे हैं। यह आरोप लगाते हुए गुरुवार की शाम मंडी में आए किसानों ने न केवल हंगामा खड़ा कर दिया, बल्कि शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम दुबे के नेतृत्व में जिला प्रशासन को आवेदन सौंपकर मंडी प्रांगण में अनिश्चितकालीन धरना देने की चेतावनी दी है।

इस तरह की जा रही है खरीदी में गड़बड़ी: मंडी में गेहूं बेचने आए किसानों ने भास्कर को बताया कि सहालग का सीजन होने से किसानों की पैसे की आवश्यकता थी। जिसके चलते अधिकांश किसानों ने 1,500-1,550 रुपए क्विंटल भाव से व्यापारियों को गेहूं बेच दिया है। इसी तरह लगभग 3,500 रुपए क्विंटल के भाव में व्यापारियों ने किसानों की सरसों खरीद रखी है। यह व्यापारी सोसायटी पर तैनात कर्मचारियों की सांठगांठ से कुछ पंजीकृत किसानों के जरिए समर्थन मूल्य का अनुचित लाभ लेकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। क्योंकि सोसायटियों पर गेहूं 2,000 रुपए समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है, वहीं सरसों 4,000 रुपए क्विंटल भाव से खरीदी जा रही है।

5 दिन पूर्व तहसीलदार ने पकड़ा था रात में बारदाना: समर्थन मूल्य पर गेहूं व सरसों की जा रही गड़बड़ी की शिकायत पांच दिन पहले भी किसानों द्वारा तहसीलदार शुभ्रता त्रिपाठी से की गई थी। तब तहसीलदार ने किसानों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंडी में रात को छापामार कार्रवाई की। इस दौरान वहां से भारी मात्रा में वारदाना जब्त किया गया। इस कार्रवाई की रिपोर्ट तहसीलदार त्रिपाठी द्वारा कलेक्टर को भेजी गई है। आगामी कार्रवाई कलेक्टर के स्तर पर ही की जानी है।

धूप व बारिश से बचने इंतजाम नहीं, कैंटीन बंद: गेहूं व सरसों से लदी सैकंडों ट्रैक्टर-ट्रॉली मंडी प्रांगण के खुले मैदान में रखी हुई हैं। ऐसे में पारा 44 डिग्री के पार होने से किसानों को मंडी में खड़ा रहना मुश्किल हो रहा है, वहीं बारिश में गेहूं भीगने की प्रबल आशंका है। किसानों की भोजन व्यवस्था के लिए मंडी प्रांगण में कैंटीन भी चालू नहीं कराई गई है। जबकि शासन के स्तर पर मंडी में गल्ला बेचने के लिए पहुंच रहे किसानों को 5 रुपए में भोजन उपलब्ध कराना निर्धारित किया गया है। लेकिन इसके बावजूद भी यहां अपनी फसल लेकर आने वाले किसानों को सुविधाओं के अभाव में परेशान होना पड़ रहा है।

मंडी में हं्गामा करते हुए हुए किसान।

5 दिन बाद भी नहीं आया नंबर

मैं 13 मई को सरसों बेचने के लिए मंडी में आया हूं। बावजूद इसके अब तक खरीदी के लिए नंबर नहीं आया। राम चित्र, ग्राम घुरैया बसई

टोकन दिए जा रहे हैं

समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए मैं 2,000 रुपए प्रतिदिन भाड़े का ट्रैक्टर लेकर 15 मई को आया था। लेकिन मेरा गेहूं अब तक नहीं खरीदा गया है। क्योंकि यहां पैसा लेकर व्यापारियों को टोकन दिए जा रहे हैं। रामजीलाल शर्मा, छैरा

शिकायत की जा चुकी है

समर्थन मूल्य पर गेहूं -सरसों बेचने वाले किसानों के साथ जौरा मंडी में गड़बड़ी की जा रही है। इसकी शिकायत मैं तहसीलदार से लेकर जिला प्रशासन तक कर चुका हूं। अगर इसमें सुधार नहीं हुआ तो हम हल्दी की मंडी प्रांगण में अनिश्चितंगे। -पुरुषोत्तम दुबे, जिलाध्यक्ष समाज वादी पार्टी मुरैना

जांच की जा रही है

मार्केटिंग सोसायटी के कर्मचारी गेहूं व सरसों की खरीद में गड़बड़ी कर रहे हैं। इसकी शिकायत किसानों द्वारा मुझसे की गई है। हमारी टीम जांच करने गई है। किसानों की सुविधा का ख्याल रखा जा रहा है। शुभ्रता त्रिपाठी, तहसीलदार जौरा

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