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नाला नं. एक को पाटने 200 अतिक्रमण चिन्हित किए, नोटिस 17 दिन बाद भी नहीं दे पाया निगम

3 वर्ष पहले
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नाला नंबर एक पर बने पक्के अतिक्रमण, जिन्हें हटाने निगम ने जारी नहीं किए नोटिस।

मैं निगमायुक्त से करूंगा बात

हाल ही में प्रशासनिक फेरबदल के तहत कलेक्टर-एसपी बदल गए हैं। फिर भी इस काम को जल्द से जल्द चालू कराने के लिए मैं निगमायुक्त से बात करूंगा रुस्तम सिंह, स्वास्थ्य मंत्री व स्थानीय विधायक

हालात: सरकारी जमीन पर बनाए मकान-दुकान

कब्रिस्तान से लेकर अंबाह बाईपास तक बना नाला राजस्व रिकार्ड में 60 फीट चौड़ाई का है लेकिन लोगों ने नाला किनारे जब भवन निर्माण किए जो दाएं व बाएं किनारे की सरकारी जमीन पर 10 से 15 फीट तक अतिक्रमण कर पक्के निर्माण कर लिए। अतिक्रमण साफ कराने के मुद्दे पर तकरार को रोकने के लिए प्रशासन ने व्यवस्था तय की है कि राजस्व विभाग की टीम नाला की सरकारी जमीन का सीमांकन करेगी। सीमांकन के दौरान सरकारी जमीन पर जितनी हद में पक्के निर्माण पाए जाएंगे उन पर नगर निगम की टीम लाल निशान लगाएगी। ताकि लोगों को तोडफ़ोड़ से पहले यह एहसास रहे कि सरकारी जमीन पर किए गए निर्माण को टूटना ही था।

हम जल्द जारी करेंगे नोटिस

एमआईसी ने मदाखलत दस्ता में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का अनुमोदन कर दिया है। अतिक्रमण के रूप में चिन्हित भवन स्वामिकयों को जल्द ही नोटिस जारी किए जाएंगे। डीएस परिहार, आयुक्त नगर निगम मुरैना

स्वास्थ्य मंत्री ने नाला पाटने मंजूर कराए हैं 21 करोड़

नाला नंबर-1 को भूमिगत करने व उसके ऊपर सीमेंट-कांक्रीट की वन-वे सड़क बनाने पर नगर निगम 21 करोड़ रुपए व्यय करेगा। यह पैसा मुख्यमंत्री अधोसंरचना मद से मंजूर किया गया है।

नाला के शुरुआत यानी कब्रिस्तान क्षेत्र में 1600 एमएम के पाइप डाले जाएंगे। अंबाह बाईपास रोड तक पहुंचते-पहुंचते पाइपों की चौड़ाई 1800 एमएम कर दी जाएगी। नाला को पाटने के बाद उसके ऊपर 50 फीट चौड़ी वन-वे सीसी सड़क का निर्माण होगा।

- सड़क के बीच डिवाइडर पर सेंट्रल स्ट्रीट लाइट लगाई जाएगी। 12 महीने का समय जैन एंड राय कंस्ट्रक्शन कंपनी को नगर निगम ने निर्माण कार्य पूरा करने के लिए दिया है।

नाला बनने से यह होगा लाभ

नाला नंबर-1 को भूमिगत करने के बाद सवा चार किलोमीटर लंबाई क्षेत्र में नाला किनारे बसे लोगों को वायु प्रदूषण की बरसों पुरानी समस्या से हमेशा के लिए निजात मिलेगी। नाला किनारे बसे आधा दर्जन वार्डों में पर्यावरणीय परिवर्तन भी दिखाई देंगे।

गणेशपुरा, गांधी कालोनी, सीताराम पतिराम धर्मशाला, माधौपुरा रोड क्षेत्र में नाला किनारे बने मकानों की कीमत डेढ़ गुना बढ़ जाएगी। क्योंकि लोगों के आवागमन के लिए वन-वे सीसी सड़क उपलब्ध होगी। बारिश के सीजन में घरों में नाले का पानी घुसने की समस्या का समाधान होगा।

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