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अब गांव में भी शहर की बेटियां आएंगी बहू बनकर

3 वर्ष पहले
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शहर की बेटियां अब बहू बनकर गांव में आ सकेंगी। क्योंकि जिले में सवा लाख से अधिक घरों में पक्के शौचालय की सुविधा हो गई है। इससे पहले गांव के लोगों को शौच के लिए खुले में जाना पड़ता था। इस प्रथा से पढ़ी-लिखी बेटियां गुरेज करती हैं।

स्वच्छ भारत मिशन के बदले नियमों ने गांव के लोगों को अपने-अपने घर में पक्के शौचालय बनाने के लिए प्रेरित किया। बीते दो बरसों के प्रयासों पर गौर करें तो एक लाख दो हजार 828 घरों में स्वच्छ शौचालय बनाए जा चुके हैं। कामयाबी के मुकाम पर पहुंची पंचायतों में पोरसा की नंदपुरा, भजपुरा, अंबाह की गोठ व भौनपुरा, मुरैना की मिरघान व भैंसोरा, जौरा की अरहेला, पहाडग़ढ़ की सिकरौदा व जलालपुर तथा कैलारस की खेड़ा तोर पंचायत शामिल है।

सोच बदल कर तस्वीर बदल दी गांव की: जौरा क्षेत्र की अरहेला पंचायत के सरपंच धर्मेंद्र सिकरवार कहते हैं कि गांव के लोगों ने स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए अपना सोच बदला और 165 घरों में पक्के शौचालय बनाकर गांव की तस्वीर बदल दी।

दो लाख शौचालय का लक्ष्य: स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले की मुरैना, पोरसा, अंबाह, जौरा, कैलारस, सबलगढ़ व पहाडग़ढ़ जनपद को वर्ष 2017-18 में एक लाख शौचालय बनाकर तैयार किए जाने थे। उनमें से मार्च तक 57857 शौचालय बनाए जा चुके हैं।

मुखिया को बनाया एजेंसी: हर घर में पक्का शौचालय हो इसके लिए शासन ने ग्राम पंचायत के अलावा परिवार के मुखिया को शौचालय का निर्माण एजेंसी बनाया है।

स्वच्छ भारत मिशन
इस साल 57857 लोगों ने सरकारी अनुदान पर अपने घरों में बनवाए हंै शौचालय
शौचालय निर्माण के लिए 500 से बढ़कर हुए 12000 रुपए

संपूर्ण स्वच्छता अभियान में शौचालय का निर्माण करने के एवज में 500 रुपए की राशि प्रदान की जाती थी। यह राशि बढ़कर 1200, 2200 व 2500 रुपए हुई। वर्ष 2011-12 में निर्मल भारत अभियान के तहत यह राशि 9900, 10900 व 12000 रुपए हो गई है। अब इसमें हितग्राही का अंशदान भी समाप्त कर दिया गया है। अब जो व्यक्ति अपनी पसंद का जैसा शौचालय बनाना चाहे वैसे बना सकता है। चाहे तो 12000 रुपए में और राशि भी अपनी ओर से मिला सकता है।

खुले में शौच की प्रथा के चलते नहीं होते थे ब्याह
सामाजिक कार्यकर्ता आशा देवी कहती हैं कि नंदपुरा में खुले में शौच की प्रथा के कारण पढ़ी-लिखी बेटियां गांव में बहू बनकर आने की तैयार नहीं होती थीं। अब हर घर में शौचालय की सुविधा की जगजाहिर होने से कस्बों के लोग अपनी बेटियों का विवाह संबंध तय करने गांव में आएंगे।

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