पानी कम, सप्लाई की मंजूरी नहीं दे सकते: पीसीसीएफ
चंबल से शहर में पानी लाने के लिए नगर पालिका ने दो सौ करोड़ की जलावर्धन योजना प्रदेश सरकार से मंजूर कराई है। लेकिन इस योजना में वन विभाग ने अड़ंगा लगा दिया है। तीन माह बाद 9 अप्रैल को पीसीसीएफ का नपा सीएमओ को पत्र मिला है, जिसमें चंबल नदी का पानी शहर के लिए देने से इंकार कर दिया है।
वन विभाग की अनुमति न मिलने पर नपाध्यक्ष दौलतराम गुप्ता ने शुक्रवार को पार्षदों की बैठक बुलाई, जिसमें वन विभाग पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। नपाध्यक्ष गुप्ता ने कहा कि नगर निगम मुरैना को चंबल से 1400 लाख लीटर पानी की अनुमति शहर में सप्लाई के लिए पिछले साल दे दी है। जबकि श्योपुर को मात्र 250 लाख लीटर पानी लेने की अनुमति नहीं दी जा रही है। नपा कार्यालय में बैठक से पूर्व सभी पार्षदों के साथ नपाध्यक्ष विधायक दुर्गालाल के घर पहुंचे। विधायक को आवेदन देकर चंबल नदी से पानी दिलाने का अनुराेध किया। विधायक से इस काम में सहयोग की मांग की है।
अभी तो सिर्फ 145 लाख लीटर की ही जरूरत, वर्ष 2033 में 250 लाख ली. की जरूरत
नपाध्यक्ष का कहना है कि वन विभाग से अनुमति मिल जाए तो टेंडर कराकर सितंबर 2018 से काम प्रारंभ करा देंगे। डीपीआर के आधार पर शहर में 2018-19 तक 145 लाख लीटर पानी और 2033 में 175 लाख लीटर पानी तथा साल 2048 तक 250 लाख लीटर पानी की जरूरत होगी। यह पानी चंबल से उठाने पर यदि कमी आती है तो मप्र के गांधीसागर डेम से कोटा बैराज डेम के माध्यम से नदी में पानी छोड़ा जा सकता है। सबसे पहले पहले पानी श्योपुर, फिर मुरैना पहुंचता है।
सेंट्रल वाटर कमीशन ने लिखा- जलावर्धन योजना के लिए नदी में पर्याप्त पानी
भारत सरकार के सेंट्रल वाटर कमीशन जूनियर इंजीनियर ऑफिस खातौली जिला कोटा राजस्थान ने चंबल नदी के जल प्रवाह का रिकार्ड उपलब्ध कराया है। डाटा भेजकर जवाबी पत्र में लिखा है कि जलावर्धन योजना के लिए पार्वती नदी में जल प्रवाह 1.500 से 2.000 क्यूविक मीटर प्रति सेकेंड और चंबल नदी में पाली पुल पर 20.000 से 25.000 क्यूविक मीटर प्रति सेकेंड रहता है। दोनों नदियों में मई व जून महीने में सबसे कम जल प्रवाह रहता है। लेकिन योजना की दृष्टि से पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता है।
विधायक दुर्गालाल विजय को ज्ञापन सौंपते नपाध्यक्ष व पार्षद।
जनता के साथ सौतेला व्यवहार चंबल में पर्याप्त पानी: नपाध्यक्ष
वन विभाग का पत्र मिलते ही नपाध्यक्ष ने पार्षदों के साथ की बैठक, भाजपा विधायक से कहा- सरकार से मंजूरी दिलाएं
पीसीसीएफ ने लिखा नदी में जल प्रवाह कम होने से अनुमति संभव नहीं
प्रधान मुख्य वन संरक्षण (वन्य प्राणी) जितेन्द्र अग्रवाल ने 9 अप्रैल को नपा को पत्र भेजा है, जिसमें लिखा है कि प्रोजेक्ट प्रस्तावित क्षेत्र में घड़ियालों व कछुओं के प्राकृतिक रहवास के नजदीक होने से उनके रहवास पर विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना है। भारतीय वन्य जीवन संस्थान देहरादून द्वारा चंबल नदी के जल प्रवाह के संबंध में प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार 151 से 164 घनमीटर प्रति सेकेंड का न्यूनतम जल प्रवाह जरूरी है। लेकिन साल 2017 के प्रतिवेदन अनुसार 67 घनमीटर प्रति सेकेंड जल प्रवाह पाया गया जो अत्यंत चिंता का विषय है।
9 पानी की टंकियां शामिल
जलावर्धन योजना के लिए दो साल से कवायद चल रही है। प्रोजेक्ट में 24 किमी अंडरग्राउंड पाइन लाइन बिछाकर शहर में 5-5 लाख लीटर क्षमता की 9 टंकियां शामिल हैं। चंबल नदी में इंटेकबेल और दांतरदा कस्बे के पास वाटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित किया गया है।
सीएम के संज्ञान मंे लाएंगे
नपाध्यक्ष का कहना है कि चंबल नदी के पानी के लिए अनुमति नहीं मिलने का मामला मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा। सीएम के संज्ञान में लाने के बाद भी समस्या का हल नहीं निकला तो श्योपुर की जनता के साथ धरना प्रदर्शन करेंगे। नपाध्यक्ष का कहना है कि यदि अनुमति मिलती है तो शहर तक पानी लाना बहुत आसान होगा।
पूरा प्रयास करेंगे
नगर पालिका के वार्ड पार्षदों के साथ अध्यक्ष मेरे घर आए थे। पहली बार लिखित आवेदन दिया है। हमने उन्हें आश्वासन दिया है कि जलावर्धन योजना में पानी के लिए मंजूरी दिलाने का पूरा प्रयास करेंगे। दुर्गालाल विजय, विधायक श्योपुर