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90 साल की उम्र में लौटी आंखों की रोशनी, बोले-फसल देख सकूंगा

3 वर्ष पहले
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आंख है तो जहान है। यह कहावत शुक्रवार को गोकुला बाबा (90) के लिए सच साबित हुई। ऐसा तब हुआ 10 साल के अंधेरे के बाद उसे आखों के ऑपरेशन उपरांत रोशनी मिल सकी। गोकुला का कहना था कि अब वह अपने खेतों पर जाकर फसल देख सकूंगा। ऐसा ही लाभ करह धाम पर लगे नेत्र शिविर में 40 लोगों को मिला है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह की पहल पर स्वास्थ्य विभाग व रतन ज्योति नेत्रालय के तत्वाधान में लगे अब तक 3 शिविरों में 400 लोगों को आंखों की रोशनी मिल चुकी है।

धनेला गांव में रहने वाले 90 वर्षीय गोकुला बाबा ने बताया कि दस साल से आंख में मोतियाबिंद का जाला होने से दिखाई देना बंद हो गया था। खेतों में लहलहाते हुए फसलें देखने को भी तरस गया था, जो एक किसान के लिए जीवन का सबसे सुखद पल होता है। शुक्रवार को गोकुला बाबा की दाईं आंख का ऑपरेशन हुआ। अब वे आंखों से परिवार के सदस्यों के अलावा फसल देख सकेंगे। इसकी क्रम में 90 साल की बुजुर्ग महिला रामदेही गुर्जर ने बताया कि दस साल से उनकी दोनों आंखें खराब हैं, लेकिन इस शिविर ने उन्हें रोशनी प्रदान कर जीने की और उम्मीद बढ़ा दी है। वहीं शिविर के दौरान उपस्थित विशेषज्ञों ने लोगों को से कहा कि आंखों में परेशानी होते ही इसे अनदेखा न करते हुए संबंधित डॉक्टर से चेकअप कराना चाहिए।

स्वास्थ्य शिविर
करह आश्रम पर लगा नेत्र कैंप, 2600 मरीजों को चश्मे बांटे, 400 के हुए मोतियाबिंद ऑपरेशन
करहधाम पर आयोजित नेत्र शिविर में आँखों की जांच करते डॉक्टर।

400 मरीजों के हुए आॅपरेशन, 2600 को वितरित किए चश्में

शिविर संयोजक राकेश सिंह ने बताया कि अब तक हुए तीन शिविर में 400 मरीजों के ऑपरेशन कराए गए हैं। इसके अलावा 2600 बुजुर्गों को चश्मे वितरित किए गए हैं। शिविर के दौरान प्रत्येक मरीज का बीपी, शुगर आदि जांचने की भी नि:शुल्क व्यवस्था की गई है। शिविर संयोजक के स्तर पर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र से नेत्र रोगियों को लाने से लेकर ऑपरेशन के बाद घर छोड़ने के लिए वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा ऑपरेशन के दौरान ग्वालियर में रहने व खाने-पीने का उचित इंतजाम किया गया है।

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