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खरीदी के साथ नए अनुबंध और विवाह होंगे शुरू

3 वर्ष पहले
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अक्षय तृतीया 18 अप्रैल को सूर्योदय से प्रारंभ होकर मध्य रात्रि तक रहेगी। यह सोना खरीदने का सबसे श्रेष्ठ दिन माना जाता है। पंडितों का कहना है कि यह अबूझ मुहूर्त वाला शुभ दिन होता है।

इस दिन वाहन, भूमि, भवन खरीदी के साथ ही विवाह, नए अनुबंध और नया व्यवसाय प्रारंभ करना भी विशेष फलदायी होता है। मान्यता है कि स्वर्ण धातु पर लक्ष्मी व विष्णु का आधिपत्य है और जीवन में सुख-समृद्धि के कारक देवी-देवता भी यही हैं। खरीदी गई वस्तु खरीदार के पास स्थाई रुप से बनी रहे, इसलिए अक्षय तृतीया पर खरीद-फरोख्त का अधिक चलन है। सोना खरीदने की दूसरी वजह यह मानी जाती है कि वैशाख माह की तृतीया से ही पुन: विवाह मुहूर्त प्रारंभ होते हैं। वर-वधु के लिए स्वर्ण आभूषण की आवश्यकता होती है। अक्षय तृतीया पर खरीदी के लिए लोगों ने अभी से सराफा दुकानों पर बुकिंग शुरू कर दी है, जिससे उन्हें मन पसंद आभूषण उस दिन मिल सकें।पंडित मनोज शास्त्री का कहना है कि अक्षय तृतीया का अर्थ है कि जिसका कभी क्षय न हो। यही वजह है कि लोग इस दिन जरूरत की वस्तुओं की खरीदी इस भावना और विश्वास के साथ करते हैं कि वह उनके पास अधिक समय तक रहेगी। इस दिन भूमि व वाहन और स्वर्ण आभूषण की सर्वाधिक खरीदी की जाती है। प्राचीन समय में लोग स्थायी संपति के रूप में सोना व भूमि ही मानते थे। तभी से अक्षय तृतीया पर इनकी खरीदी का चलन बना हुआ है।

सूर्यदेव को जल चढ़ाने के बाद सत्तू, ककड़ी, खरबूजा, सकोरे व घड़े का करंे दान
अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य करना शुभ
अक्षय तृतीया पर नारायण, परशुराम और हृयग्रीव का अवतार हुआ था। ब्रह्मा के पुत्र अक्षय कुमार का भी इस दिन जन्म हुआ था। उन्होंने बताया कि तृतीया पर सर्वार्थ सिद्धि योग का होना भी इस दिन शुभ संयोग है। इस दिन खरीद-फरोख्त को और अधिक शुभता मिल सके इसके लिए सूर्यदेव को जल चढ़ाने के बाद सत्तू, ककड़ी, खरबूज, सकोरे व घड़े आदि का जरूरतमंदों को दान करना चाहिए।

सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग

खरीदारी के लिए ये रहेगा मुहूर्त
सुबह 9.02 से 12:21 बजे -अमृत व शुभ

दोपहर-3.18 से 7.45 बजे -चर, लाभ

रात-8.05 से 11.33 बजे -शुभ-अमृत

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