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वन विभाग रखेगा शिकारियों पर नजर 200 लोगों के साथ शुरू की गश्त

3 वर्ष पहले
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माउंट आबू. वन्यजीवों के शिकार को रोकने के लिए वन विभाग ने टीमें गठित की।

भास्कर न्यूज | माउंट आबू

जिले के माउंट आबू क्षेत्र में आदिवासियों की पुरातन मान्यताओं के चलते आखातीज को लेकर वन्यजीवों के शिकार की घटनाओं की रोकथाम के लिए वनविभाग पूरी तरह तैयार है। आखातीज को लेकर तीन दिन के लिए वनक्षेत्र में सघन गश्त की शुरूआत हो गई और विभाग ने सभी साधनों के साथ माउंट आबू के 326 हैक्टेयर क्षेत्र पर गश्त की जाएगी। वनविभाग की ओर से जंगल में व्यापक स्तर पर गश्त के लिए वनकर्मियों के साथ पुलिस इमदाद भी ली गई है, जिसके लिए पुलिस महकमे को वनविभाग की ओर से इमदाद के लिए अनुरोध पत्र पहले ही भेजा जा चुका है। गश्ती दल शिकार, अवैध रूप से खनन की रोकथाम के लिए भी क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखेगा। उपवन संरक्षक हेमंत सिंह के अनुसार वन्यजीवों के शिकार पर रोक लगाने की कारगर व्यवस्था के चलते आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में पुलिस व वनकर्मियों की गश्त, जगह-जगह नाकाबंदी व्यवस्था के लिए मुखबिरों की नियुक्ति की गई है। जाब्ते निरंतर वन्यजीवों के शिकार होने के संभावित वनक्षेत्रों की रात-दिन गश्त करेंगे। आखातीज के मौके पर वन्यजीवों के शिकार पर लगाम कसने को वनकर्मियों को ड्यूटी बांट दी गई है। उनके साथ पुलिस इमदाद भी मौजूद रहेगी। मुखबीर नियुक्त किए गए है। आखातीज के दिन हर वर्ष की तरह पूरे वनमंडल में सभी रेंजों में गश्ती दल भेजे जाएंगे। अलग से पेट्रोलिंग भी की जा रही है।

आखातीज पर है शिकार की परंपरा

क्षेत्र के आदिवासियों में आखातीज पर शिकार की हेडा परंपरा है। इस दिन वे मुहूर्त निकाल कर वन्यजीवों का शिकार करते है। आखातीज के एक दिन पहले से ही शिकार शुरू हो जाता है, जो अगले दिन तक जारी रहता है। हर वर्ष जिले के आदिवासी अंचलों में बड़ी संख्या में वन्यजीवों का शिकार होता है। - हेमंत सिंह, उपवन संरक्षक, माउंट आबू

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