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देश में कोकिंग कोल को लेकर माउंट आबू में हुई इस्पात मंत्रालय की बैठक

3 वर्ष पहले
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इस्पात मंत्री वीरेंद्र चौधरी ने सोमवार को देश में कोकिंग कोल को लेकर मंत्रालय अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में सांसद जनार्दन सिंह, शेर सिंह, बहुत सिंह, विद्युत वरण महतो, रामकुमार वर्मा, लक्ष्मण, संयुक्त सचिव मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी रुचिका चौधरी एवं पुनीत बंसल मौजूद रहे। बैठक के बाद पत्रकारों से रूबरू हुए इस्पात मंत्री वीरेंद्र चौधरी ने बताया कि इस्पात को बनाने के लिए दो बड़े कंपोनेंट है, जिसमें एक आयरन एवं दूसरा कोयला अर्थात कोयले में भी कोकिंग कोल खास है। कोकिंग कोल में हमारे देश में उपलब्धता नहीं है जो है वो भी न के बराबर है। मोटे तौर पर कहा जाए तो 85 प्रतिशत तक जो कोकिंग कोल है जो इस्पात बनाने में काम आता है जोकि वह हम बाहर से लेते हैं। इस प्रकार से विदेशी मुद्रा का बहुत बड़ा हिस्सा कोकिंग कोल लेने में लगता है। उन्होंने बताया कि इस बैठक में चर्चा इसी बात पर थी कि ऐसा कोई विकल्प हो सकता है क्या जिसमें हम कोकिंग कोल की जगह कुछ और इस्तेमाल कर सकते हैं। क्योंकि, हमारे देश में जहां तक कोयला है जिसे थर्मल बोल भी कहा जाता है उसकी उपलब्धता तो बहुत है, लेकिन हम कुछ ऐसा कर सकते हैं जिससे 15 से20 प्रतिशत ऐसा कोयला है जिसमें थर्मल बोल को कोकिंग बोल में परिवर्तित करते हैं। लेकिन, इसके साथ-साथ यह भी है कि हमारे देश में लोहे की खपत दुनिया के मुकाबले में बहुत कम है। दुनिया में प्रति व्यक्ति 208 किलोग्राम की खपत है, जबकि हमारे देश में यह खपत प्रति व्यक्ति 67 किलोग्राम है। हम सिर्फ ग्राम क्षेत्र को देखें तो यह खबर 10 या 12 किलोग्राम ही प्रति व्यक्ति है। इसे बढ़ावा देने के लिए क्या प्रयास किए जाने इस विषय के बारे में आज चर्चा की गई।

सांसदों ने दिए सुझाव, कुछ पर अमल भी हुआ

मंत्री ने बताया कि बैठक में शामिल छह सांसदों ने हमें कुछ सुझाव दिए है जिसमें से कुछ सुझाव पर हमने पहले ही कार्य भी शुरू किया कर दिया था। कुछ सुझाव के तहत हम आगे की ओर अपना कार्य को बढ़ावा देंगे एवं कुछ नई चीजें भी बताई गई है, जिसमें हमारा मंत्रालय भी विचार करेगा।



उन्होंने बताया कि हमने एक नई संस्था थी स्थापित की हैं जो एसआरटीआई है, जिसमें स्टील एवं टेक्नोलॉजी रिसर्च का एक इंस्टिट्यूट स्थापित किया है। जिसमें स्टील उत्पादन करने वाले पीएस यूज एवं इंटीग्रेट स्टील प्लांट जो बड़े प्लांट से जो 40 से 50 हजार करोड़ के स्थापित हुए हैं चाहे वह सेल है चाहे वह राष्ट्रीय इस्पात निगम है चाहे टाटा है आदि स्कीम प्लांट्स है।

इस्पात बनाने में कोकिंग कोल का इस्तेमाल 12% घटाया

इस्पात मंत्री ने बताया कि पिछले एक साल में प्रति टन इस्पात बनाने में कोकिंग कोल का इस्तेमाल होता था उसको 12 प्रतिशत तक घटाया है। दिल्ली में नई रेल बनाई है जो दुनिया की सबसे लंबी रेल है यानी इसका एक पीस 260 मीटर लंबा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय इस्पात नीति जिसका 67 पर कैपिटा है उसे हमने 2031 में 160 किलो ले जाने का फैसला किया है। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री विष्णुदेव शाही भी मौजूद रहे।

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