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10 साल पहले मंच के सामने बन रहा था ड्रेसिंग रूम रुका काम, नए सिरे से निर्माण की कवायद शुरू
एक्सीलेंस का मैदान दस साल बीत जाने के बाद भी मिनी स्टेडियम नहीं बन पाया है। 2009 में मिनी स्टेडियम के लिए 90 लाख रुपए स्वीकृत हुए लेकिन निर्माण शुरू होते ही ड्रेसिंग रूम की जगह बदलने को लेकर मिनी स्टेडियम का निर्माण आपसी विवाद का शिकार हो गया।
खिलाड़ियों ने ही स्थान परिवर्तन काे लेकर निर्माण पर आपत्ति लगा दी और काम रुक गया। दस साल बाद एक बार फिर नपा ने मिनी स्टेडियम बनाने कार्रवाई शुरू की है। एस्टीमेट बनाकर तकनीकी स्वीकृति के लिए नगरीय प्रशासन विभाग को भेज दिया गया है। तकनीकि स्वीकृति के बाद निर्माण शुरू हो सकेगा। मिनी स्टेडियम बनने से नगर के तीन सौ से अधिक खिलाड़ियों को मैदान उपलब्ध हो सकेगा। स्कूल के स्टूडेंट्स भी खेल का अभ्यास नई सुविधाओं के साथ कर सकेंगे।
10 साल में बढ़ी लागत : खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने मिनी स्टेडियम के लिए 2009 में 90 लाख रुपए स्वीकृत किए थे। निर्माण एजेंसी नपा को राशि दो चरण में मिलना थी। पहले चरण में 8 निर्माण कार्य 33.76 लाख रुपए से शुरू होना था। 2010 में ठेकेदार ने निर्माण शुरू हुआ। जिसमें केवल बाउंड्रीवाल बनी। नए एस्टीमेट में ड्रेसिंग रूम, समतलीकरण, गेट, फेंसिंग, नाली निर्माण, सेपटिक टैंक के लिए 47.89 लाख का प्रावधान किया है। 10 साल में मिनी स्टेडियम की लागत 14.13 लाख रुपए बढ़ गई है।
इसलिए रुका था काम
अगस्त 2010 में मैदान के पूर्व और दक्षिण दिशा में बाउंड्रीवाल और गेट के साथ ड्रेसिंग रूम के लिए खुदाई हुई थी। ड्रेसिंग रूम मंच के ठीक सामने बनाया जा रहा था। जिससे मैदान का क्षेत्रफल कम हो रहा था। इस पर खिलाड़ियों ने आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने नपा से मैदान की वास्तविक स्थिति का नक्शा मंगवाया। जिसके बाद काम रुक गया।
ड्रेसिंग रूम के जगह परिवर्तन पर सहमति बन गई है। नए सिरे से निर्माण के लिए टीएस का प्रस्ताव भेजा गया है। लागत बढ़ने के कारण बजट स्वीकृति की प्रक्रिया भी की जा रही है। स्वीकृति आते ही निर्माण शुरू हो सकेगा। हेमंत शर्मा, नपाध्यक्ष