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बेटियों को आसमान छूने की चाहत, स्कूल दसवीं तक

3 वर्ष पहले
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मुंडावर उपखंड के अंतर्गत कस्बा सोड़ावास में बेटियां पढ़-लिखकर आसमां छूने की चाह रखती हैं। वे कठिन परिस्थितियों में भी कॉलेज स्तर तक पढ़ना चाहती हैं, लेकिन यहां दसवीं कक्षा तक स्कूल है। ऐसे में बेटियों को आगे पढ़ने के लिए उनके माता-पिता शहर नहीं भेज पाते और बेटियां पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं। यहां स्कूल खोलने के लिए अभिभावकों ने जनप्रतिनिधियों और संबंधित सरकारी अधिकारियों के कार्यालयों में ना जाने कितने चक्कर लगाए लेकिन यह सीनियर स्कूल सैकंडरी नहीं हो पाया। मुंडावर से 15 किलोमीटर की दूरी पर सोड़ावास कस्बा स्थित है जहां सीनियर स्कूल नहीं है। इसमें लगभग 300 का नामांकन है शिक्षा विभाग की ओर से राजनीतिक आधार पर ऐसे गांव में स्कूल प्रॉमिस किए गए हैं जहां फिलहाल आवश्यकता नहीं है। यहां के लोग इस स्कूल को सीनियर स्कूल कराने के लिए बहुत प्रयास कर चुके हैं। इस गांव में बेटों के साथ बेटियों को पढ़ने की चाहत है और उनका नामांकन लड़कों से कम नहीं है। सोडावास गांव में अभिभावकों के मन में बच्चों को पढ़ाने की ललक है यहां की महिला कमला देवी प्रजापत कहती है कि आज के इस जमाने में बेटियों को दसवीं पढ़ाना ही काफी नहीं है, हम बेटियों को दसवीं के बाद भी पढ़ाई के लिए शहर में नहीं भेज सकते हमारे बच्चे ऐसे में ना तो अनपढ़ हैं और ना ही अधिक पढ़े हुए हैं ।

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