मुंगावली| भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम है। राम ने अपने जीवन में मर्यादा का पालन किया था, इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहा जाता है। अगर वो मर्यादा का पालन नहीं करते तो भगवान विष्णु जी के अवतार होते हुए भी लंकापति रावण को नहीं मार पाते। यह बात कुशवाह कॉलोनी में चल रही संगीतमय भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक पं. सूर्यप्रकाश पाठक ने कही।
उन्होंने कहा कि भगवान राम ने हर काम में मर्यादा का पालन किया। भगवान जो भी करते हैं, सही ही करते हैं। हर मनुष्य को भगवान से सीख लेना चाहिए और जीवन में मर्यादा का पालन करना चाहिए। मर्यादा के पालन न करने से ही कलयुग में पाप, अनाचार बढ़ रहा है।
अच्छे संस्कार बच्चों को दें, जिससे परिवार का मान सम्मान बढ़े। जैसा श्रीराम ने अपने परिवार का मान सम्मान बढ़ाया। कथा वाचक ने भगवान श्रीकृष्ण सुदामा मित्रता का प्रसंग सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि सुदामा और भगवान श्रीकृष्ण की दोस्ती जैसी उदाहरण मिलना असंभव है। जब सुदामा श्रीकृष्ण के पास द्वारिका में आए थे तो वह एक भिखारी के हालात में थे और महलों की आभा को देखकर अपनी सोच में थे, मगर श्रीकृष्ण को सुदामा के बारे मे पता चला तो वह भागते हुए आए और अपने दोस्त को आदर सत्कार के साथ महल में प्रवेश दिलाया।