आधुनिक तकनीक का उपयोग कर किसान खेती कर बढ़ा सकते हैं आय
कलेक्टर डी सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना की जिला स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक सोमवार को कलेक्टोरेट स्थित मनियारी सभाकक्ष में हुई।
बैठक में इस योजना में आने वाले समस्त हस्तक्षेप फसल प्रदर्शन, बीज वितरण व उत्पादन, प्रशिक्षण, 50 प्रतिशत अनुदान पर हस्तचलित व शक्ति चलित और अन्य कृषि आदान सामग्रियों के अनुदान प्रावधान पर किया जाता है, जैसे सीधी कतार बोनी, कतार में रोपाई, एसआरआई से धान की खेती, हाईब्रीड धान प्रदर्शन, फसल पद्धति आधारित प्रदर्शन तथा अंतरवर्ती फसल प्रदर्शन का आयोजन किया जाता है। इसे कृषक अपनाकर उत्पादन में वृद्धि कर सकते हैं। इन तकनीकों के साथ धान, मक्का, चना, अरहर की नयी किस्में जो कि 10 वर्ष में अंदर की है तथा अधिक उत्पादन देने वाली होती है।
तकनीकी खेती के बारे में दी गई जानकारी
तकनीकी खेती से होने वाले लाभ के बारे में उप संचालक कृषि द्वारा जानकारी दी गई तथा इस योजना में 50 प्रतिशत अनुदान पर जैव उर्वरक, सूक्ष्म तत्व, नींदानाशक, पीपी केमिकल लाईन देने का प्रावधान है जो कि फसलों के सुरक्षा तथा भूमि सुधार में अत्यंक लाभदाय होता है। इस प्रकार के अनुदान के लिए बीज निगम की साईट चैम्प्स में कृषक स्वयं या अन्य स्थानों से आॅनलाईन आवेदन कर सकते हैं। धान बीज वितरण में 1 हजार रूपए प्रति क्विंटल वितरण अनुदान दिया जाता है तथा दलहनी फसलों में वर्तमान वित्तीय वर्ष में 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल वितरण अनुदान दिए जाने का प्रावधान रखा गया है। साथ ही 50 प्रतिशत अनुदान में वितरण किए जाने वाले कृषि आदान व कृषि उपकरणों की महत्ता का वर्णन किया गया तथा खेती में कृषि यांत्रिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करना बताया गया। समीक्षा के दौरान कलेक्टर द्वारा तय सीमा में प्राप्त होने वाले भौतिक व वित्तीय लक्ष्य को पूर्ण करने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए