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प्रदेश में पिस्ता की खेती पर शुरू होने से पहले ही संकट के बादल, टर्की और इरान ने किया इनकार
प्रदेश में पिस्ता की खेती पर शुरू होने से पहले ही संकट के बादल मंडराने लग गए हैं। लंबे प्रयासों के बाद भी कृषि विभाग के उद्यानिकी निदेशालय को इसके पौधे नहीं मिल पा रहे हैं। टर्की और इरान ने पिस्ता के पौधे देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। मामला एकाधिकार (मॉनोपॉली) को जो है।
अब राज्य सरकार को इरान की राजधानी तेहरान की विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर से थोड़ी उम्मीद है। उद्यान निदेशालय के अधिकारी लगातार प्रयास में लगे हैं। हमारे देश में पिस्ता की खेती नहीं होती, लेकिन खपत यहां अच्छी खासी होती है। देश में 5000 टन सालाना का आयात होता है। पिस्ता की खेती दुनिया में तीन देशों टर्की, इरान और अमेरिका में ही होती है। इसके लिए ठंडा और गर्म दोनों तरह का वातावरण चाहिए। कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी ने प्रायोगिक तौर पर राज्य के छह सरकारी फार्मों श्रीगंगानगर, चूरू, लूणकरणसर, बस्सी, देवड़ावास और थड़ोली में करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने बताया कि पहले टर्की से और फिर इरान से पिस्ता के पौधे लाने के प्रयास किए। टर्की ने पहले तो सकारात्मक रुख दिखाया, लेकिन बाद में स्पष्ट इनकार कर दिया। यही रवैया इरान का रहा। राज्य में दो वैरायटी पीटर और कर्मर नामक पौधे लाने के प्रयास किए गए, इनमें एक मेल और दूसरा फीमेल होता है।
राजदूतों के माध्यम से प्रयास
कृषि मंत्री के अनुसार पिस्ता के पौधे लाने के लिए भारत के टर्की और इरान में मौजूद राजदूतों के माध्यम से काफी प्रयास किए। इन्हीं देशों के भारत में मौजूद राजदूतों से भी लगातार प्रयास किए, लेकिन टर्की की सरकार पिस्ता के पौधे केनिर्यात की अनुमति नहीं देती। अमेरिका ने सीधे मना करने के स्थान पर यह कह कर टाल दिया कि भारत का जलवायु इसके लिए अनुकूल नहीं है।
ईरान की मनाही से तेहरान के प्रोफेसर से उम्मीद
इरान की मनाही के बावजूद राजधानी तेहरान की विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर से उम्मीद बनी हुई है। प्रोफेसर ने मोटी व एडवांस फीस के बदले पौधे एवं तकनीक देने की सहमति दी है। राज्य सरकार फीस देने को तो तैयार हैं, लेकिन प्रजेंटेशन से संतुष्ट होने के बाद ही फीस देने को लेकर मामला अटका है।
राज्य में खेती के लिए केंद्र सरकार भी सहमत
पिस्ता के पौधे लाकर राज्य में खेती करने के लिए केंद्र सरकार भी सहमत है। विदेश से पौधे लाने के लिए बने प्लांट प्रोटेक्शन एंड कोरेन्टाइन एक्ट में ऐसी कोई रोक नहीं है। इस एक्ट के तहत बाहर से लाए जाने वाले पौधों की रोग और कीटाणुओं के मामले में जांच की जाती है।