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प्रशासन ने अनुमति ही 11 बजे दी: महासभा आयोजक लेने ही नहीं आए: जिला प्रशासन
भरतपुर | संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर कार्यक्रम तो हुए, लेकिन भरतपुर में शहर बाबा साहब की शोभायात्रा नहीं निकल सकी। क्योंकि जिला जाटव महासभा को जिला प्रशासन से इसकी अनुमति ही शनिवार 11 बजे मिली।
यात्रा का समय चूंकि दोपहर 2 बजे से था। इसलिए इतना समय ही नहीं था कि शोभायात्रा की तैयारी की जा सकें। इसलिए आयोजक जिला प्रशासन के पास अनुमति लेने ही नहीं गए। इधर, झगड़े और माहौल बिगड़ने की आशंका के मद्दे नजर बाबा साहब की प्रतिमाओं पर बिठाया गया पुलिस पहरा भी शनिवार शाम को हटा लिया गया। जिला जाटव महासभा समिति के जिलाध्यक्ष मोती सिंह ने शोभायात्रा नहीं निकलने के लिए जिला प्रशासन और सरकार को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि उन्हें इसकी स्वीकृति ही शनिवार सुबह 11 बजे जारी की गई। जबकि शोभायात्रा का समय दोपहर 2 बजे से था। इसलिए इतने कम समय में न तो झांकियां तैयार हो सकती थीं और न ही लोगों को एकत्रित किया जा सकता था। जिला प्रशासन की ओर से कहा गया था कि 2-4 झांकियों और बहुत कम लोगों की उपस्थिति के साथ सूक्ष्म रूप से यात्रा निकाली जाए। ऐसा संभव नहीं था। भाजपा सरकार के इशारे पर हमें शोभायात्रा की मंजूरी नहीं दी गई। जबकि इसके लिए आवेदन 9 और 12 अप्रैल को ही कर दिए थे।
इधर, एडीएम सिटी दिनेश जांगिड़ ने बताया कि शोभायात्रा की अनुमति के लिए आयोजकों ने आवेदन ही शुक्रवार शाम करीब 7.30 बजे दिया था। चूंकि शोभायात्रा की सुरक्षा भी जरूरी थी, इसलिए पुलिस की सहमति के लिए आवेदन एसपी कार्यालय को भेजा गया। उन्होंने एसएचओ से रूट चार्ट की जांच कराने के बाद अपनी सहमति दी। इसके बाद शनिवार सुबह 10 बजे जिला कलेक्टर एन. के. गुप्ता ने भी अपनी मंजूरी दे दी। इसके बाद आयोजकों को कई बार फोन किए गए कि वे शोभायात्रा के लिए मंजूरी ले जाएं। लेकिन, सुबह 11 बजे तक कोई मंजूरी लेने नहीं आया।
आखिरी समय में बदलना पड़ा आवेदक
इधर, जिला जाटव महासभा समिति के जिलाध्यक्ष मोती सिंह ने दावा किया है कि उन्होंने 9 और 12 अप्रैल को मंजूरी के लिए आवेदन कर दिए थे, लेकिन उन्हें जानबूझकर मंजूरी देरी से दी गई। जबकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि पहला आवेदन मोती सिंह ने अपने नाम से किया था। चूंकि 2 अप्रैल को हुए आंदोलन में उनके खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज था। इसलिए उन्हें मंजूरी नहीं मिल सकती थी। समिति ने दिनेश के नाम से शुक्रवार की शाम आवेदन किया। जाटव महासभा के दूसरे गुट की ओर से शोभायात्रा नहीं निकालने की बात कही गई थी। शोभायात्रा में झांकियों की संख्या और लोगों की तादाद को लेकर भी स्वीकृति मिलने में देरी हुई।
16 अप्रैल को तय होगी शोभायात्रा की नई तिथि
जिला जाटव महासभा समिति के अध्यक्ष मोती सिंह ने बताया कि 16 अप्रैल को मीटिंग होगी, जिसमें शोभायात्रा निकालने की तिथि तय की जाएगी। वैसे 4 मई तक कभी भी शोभायात्रा निकाली जा सकती है। शनिवार को समिति की ओर से पटपरा, सोगरिया मोहल्ला, इंदिरा नगर, सेवर, कउआ का नगला आदि में अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
भरतपुर | संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर कार्यक्रम तो हुए, लेकिन भरतपुर में शहर बाबा साहब की शोभायात्रा नहीं निकल सकी। क्योंकि जिला जाटव महासभा को जिला प्रशासन से इसकी अनुमति ही शनिवार 11 बजे मिली।
यात्रा का समय चूंकि दोपहर 2 बजे से था। इसलिए इतना समय ही नहीं था कि शोभायात्रा की तैयारी की जा सकें। इसलिए आयोजक जिला प्रशासन के पास अनुमति लेने ही नहीं गए। इधर, झगड़े और माहौल बिगड़ने की आशंका के मद्दे नजर बाबा साहब की प्रतिमाओं पर बिठाया गया पुलिस पहरा भी शनिवार शाम को हटा लिया गया। जिला जाटव महासभा समिति के जिलाध्यक्ष मोती सिंह ने शोभायात्रा नहीं निकलने के लिए जिला प्रशासन और सरकार को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि उन्हें इसकी स्वीकृति ही शनिवार सुबह 11 बजे जारी की गई। जबकि शोभायात्रा का समय दोपहर 2 बजे से था। इसलिए इतने कम समय में न तो झांकियां तैयार हो सकती थीं और न ही लोगों को एकत्रित किया जा सकता था। जिला प्रशासन की ओर से कहा गया था कि 2-4 झांकियों और बहुत कम लोगों की उपस्थिति के साथ सूक्ष्म रूप से यात्रा निकाली जाए। ऐसा संभव नहीं था। भाजपा सरकार के इशारे पर हमें शोभायात्रा की मंजूरी नहीं दी गई। जबकि इसके लिए आवेदन 9 और 12 अप्रैल को ही कर दिए थे।
इधर, एडीएम सिटी दिनेश जांगिड़ ने बताया कि शोभायात्रा की अनुमति के लिए आयोजकों ने आवेदन ही शुक्रवार शाम करीब 7.30 बजे दिया था। चूंकि शोभायात्रा की सुरक्षा भी जरूरी थी, इसलिए पुलिस की सहमति के लिए आवेदन एसपी कार्यालय को भेजा गया। उन्होंने एसएचओ से रूट चार्ट की जांच कराने के बाद अपनी सहमति दी। इसके बाद शनिवार सुबह 10 बजे जिला कलेक्टर एन. के. गुप्ता ने भी अपनी मंजूरी दे दी। इसके बाद आयोजकों को कई बार फोन किए गए कि वे शोभायात्रा के लिए मंजूरी ले जाएं। लेकिन, सुबह 11 बजे तक कोई मंजूरी लेने नहीं आया।
कार्यक्रम संपन्न हो गया इसलिए दूसरी जगह लगाया : एसपी
अंबेडकर जयंती के आयोजन से पूर्व सुरक्षा व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अंबेडकर की मूर्तियों पर पुलिस का पहरा लगाया गया था। आयोजन संपन्न होने पर पुलिस को अन्य ड्यूटियों पर लगा दिया गया है।
-अनिल कुमार टांक, एसपी