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लापरवाही: पांचौड़ी में नसबंदी शिविर 20 महिलाओं की तबीयत बिगड़ी

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | पांचौड़ी/नागौर

चार साल पहले जून 14 को जायल में नसबंदी शिविर के दौरान केस बिगड़ने से धापू देवी की मौत हो गई थी। इस मामले में मेरी स्टॉप नाम के एनजीओ की लापरवाही सामने आने पर जायल में शिविर लगाने पर बैन कर दिया गया था। इसी एनजीओ को अब सरकार ने फिर नसबंदी शिविर लगाने का काम दे दिया। हुआ भी वही। शनिवार को पांचौड़ी में एनजीओ ने फिर लापरवाही बरती। अधूरी व्यवस्थाओं के साथ लगाए गए शिविर में 85 महिलाएं तड़पती रहीं। पीने का पानी तक नहीं था। छाया के लिए लाए गए टेंट भी नहीं लगाए गए। शिविर में एनजीओ मेरी स्टॉप ने जमकर लापरवाही की। यहां 45 डिग्री के तापमान में महिलाओं को जमीन पर सोना पड़ा। इनमें से करीब 20 की तबीयत खराब हो गई। महिलाएं व उनके साथ आए बच्चे भी पानी के लिए तरसते रहे। जनरेटर दिखावे के तौर पर रखा। कई महिलाएं अव्यवस्था देख घबरा गईं और बिना ऑपरेशन करवाएं ही लौट गई।

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चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज चौधरी ने कहा कि पहले दिन ही टीम काे कह दिया था कि इस बार केस ज्यादा होंगे ताे व्यवस्था पहले से ही कर लें मगर टीम 9 बजे अाने की बजाय 12 बजे पहुंची। साढ़े चार बजे दूसरी टीम पहुंची। पहली टीम में डाॅ. दीपक वर्मा जाेधपुर से व दूसरी टीम में नागाैर के जेके चारण पहुंचे। चेकअप डाक्टर अाेपी वर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि मेरे पास कल ही एनजीओ आया था। व्यवस्थाओं को लेकर मैंने कहा था कि दो दिन शिविर आगे बढ़ाया जाए।

देखभाल के लिए पैसे की कमी नहीं

शिविर हर माह होते है। एनजीओ को प्रति महिला मरीज Rs.1380 व प्रति पुरुष मरीज Rs.680 मिलते हंै। व्यवस्था का खर्च भुगतान किया जाता है। डॉ. शीशराम चौधरी, एडि. सीएमएचओ

पानी के कैंपर 7 ही रखे। महिलाएं, परिजन व बच्चे 250 से ज्यादा थे। नतीजा आधे घंटे में अस्पताल में पानी खत्म हो गया। लोग कहते रहे मगर किसी ने व्यवस्था नहीं की।

टेंट का खर्चा चिकित्सा विभाग देता है। यहां शामियाने व जनरेटर आया। मगर उसे काम में नहीं लिया गया। मगर इसका उपयोग नहीं किया।

धूप में महिलाएं परेशान होती रहीं। उन्हें एक कमरे में लेटा दिया। वहां भी पंखा नहीं था। परिजनों ने ऑपरेशन कराने वाली महिलाओं को हाथ पंखे से हवा दी।

व्यवस्थाएं सरकार की हमारी नहीं

हमारे एनजीओ का काम महिला नसबंदी के ऑपरेशन करना है। बाकी सारी व्यवस्था सरकार करती है। प्रफुल्ल जोशी, मेरी स्टॉप एनजीओ

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