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4 साल पहले जिस एनजीओ की लापरवाही से महिला की मौत, उसे फिर काम, नतीजा: पांचौड़ी में तड़पीं 85 महिलाएं

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | पांचौड़ी/नागौर

चार साल पहले जून 14 में जायल में नसबंदी शिविर के दौरान केस बिगड़ने से धापू देवी की मौत हो गई थी। इस मामले में मेरी स्टॉप नाम के एनजीओ की लापरवाही सामने आने पर जायल में शिविर लगाने पर बैन कर दिया गया था। इसी एनजीओ को अब सरकार ने फिर नसबंदी शिविर लगाने का काम दे दिया। हुआ भी वही। शनिवार को पांचौड़ी में एनजीओ ने फिर लापरवाही बरती। अधूरी व्यवस्थाओं के साथ लगाए गए शिविर में 85 महिलाएं 9 घंटे तड़पती रहीं। यहां तक कि पीने का पानी नहीं था। छाया के लिए लाए गए टेंट भी नहीं लगाए गए।

मामले के अनुसार पांचौड़ी में नसबंदी शिविर में एनजीओ मेरी स्टॉप ने जमकर लापरवाही की। यहां 45 डिग्री के तापमान में जहां महिलाओं को जमीन पर सोना पड़ा । महिलाएं व उनके साथ आए बच्चे भी पानी के लिए तरसते रहे। छाया के लिए लाया गया टेंट भी एक तरफ रखवा दिया गया, लोग धूप में बैठे रहे। जनरेटर दिखावे के तौर पर रखा। जबकि कनेक्शन देकर पंखे चालू करने थे। गर्मी से बचने के लिए कूलर भी नहीं थे। नसबंदी ऑपरेशन करने के बाद महिलाओं को जमीन पर ही सुला दिया गया। कई महिलाएं अव्यवस्था देख घबरा गईं और बिना ऑपरेशन करवाएं ही लौट गई। इस मामले में सीएमएचओ कार्यालय भी लोगों ने शिकायत भेजी। ग्रामीणों ने कहा कि इस मामले में चिकित्सा मंत्री को भी शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

ये तस्वीरें बता रही लक्ष्य पूरा करना मकसद, महिलाएं भले ही तड़पते रहें

नागौर. ऑपरेशन के बाद महिलाओं को जमीन पर ही लिटा दिया।

भास्कर पड़ताल

आठ साल से चूक

17 जून 14 को जायल में इसी एनजीओ ने शिविर लगाया था। नसबंदी के बाद महिला की देखभाल नहीं की। इस वजह से ऑपरेशन कराने वाली महिला धापू देवी की तबीयत बिगड़ने पर मौत हो गई थी। तब एनजीओ को जायल के लिए बैन कर दिया गया था। उसके कुछ दिन बाद कुचेरा में फिर इसी एनजीओ ने शिविर लगाया। वहां भी महिलाओं की तबीयत बिगड़ी थी। बावजूद इसके सरकार ने इसी एनजीओ को काम दिया है। सीएमएचओ कार्यालय के अनुसार एनजीओ मेरी स्टॉप को नसबंदी कैंप लगाने का जिम्मा जयपुर से ही दिया गया है। यह एनजीओ 2010 से काम कर रहा है। लापरवाही संबंधी पहले रिपोर्ट भेजी गई थी।

2010 से नसबंदी शिविर का काम एनजीओ मेरी स्टॉप को ही मिल रहा है, जायल में 2014 में बैन भी लगाया

चिकित्सकों ने सलाह दी, एनजीओ नहीं माना

एमओ डॉ. मनोज चौधरी ने कहा कि पहले दिन ही टीम काे कह दिया था कि इस बार केस ज्यादा होंगे। व्यवस्था कर लें। टीम 9 बजे अाने की बजाय 12 बजे पहुंची। साढ़े चार बजे दूसरी टीम पहुंची। पहली टीम में डाॅ. दीपक वर्मा जाेधपुर से व दूसरी टीम में नागाैर के जेके चारण पहुंचे। डाक्टर अाेपी वर्मा ने कहा कि मैंने कहा था कि दो दिन शिविर आगे बढ़ाया लें गर्मी ज्यादा है।

पानी-टेंट कुछ नहीं

पानी के कैंपर 7 ही रखे। महिलाएं, परिजन व बच्चे 250 से ज्यादा थे। आधे घंटे में अस्पताल में पानी खत्म हो गया।

टेंट का खर्चा चिकित्सा विभाग देता है। शामियाने व जनरेटर आया। उसे काम में नहीं लिया। टीम दिखावे के लिए शामियाने के फोटो खींचकर रह गई, उपयोग नहीं किया।

धूप में महिलाएं परेशान होती रहीं। उन्हें एक कमरे में लेटा दिया। वहां भी पंखा नहीं था। परिजनों ने ऑपरेशन कराने वाली महिलाओं को हाथ पंखे से हवा दी।

पैसे की कमी नहीं

विभाग की ओर से महिलाओं के नसबंदी शिविर हर महीनें होते हैं। शिविर में सहयोग करने वाले एनजीओ को प्रति महिला मरीज के 1380 रुपए और प्रति पुरुष मरीज के 680 रुपए मिलते हैं। जितना व्यवस्था में धन लगता है उतना भुगतान किया जाता है। शिविर को लेकर सरकार की ओर से बजट की कमी नहीं रहती है। डॉ. शीशराम चौधरी, एडि. सीएमएचओ

व्यवस्थाएं सरकार करे

हमारे एनजीओ का काम शिविर के दौरान महिलाओं की नसबंदी के ऑपरेशन करना है। बाकी सारी व्यवस्था सरकार को करनी होती है। जो व्यवस्थाएं पांचौड़ी में की गई हैं। वह हमारी ओर से ही की गई हैं। इसका खर्च हम ही वहन कर रहे हैं। प्रफुल्ल जोशी, मेरी स्टॉप एनजीओ प्रतिनिधि

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