कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को 6 दिन का आवासीय प्रशिक्षण लेना जरूरी है। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में सोमवार को नागौर ब्लॉक के 180 शिक्षकों के लिए शुरू हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रीष्मकालीन शिक्षक प्रशिक्षण शिविर में पहले दिन 180 में से 155 शिक्षक ही पहुंचे। शिविर में नहीं पहुंचने वाले 25 शिक्षक शिविर में नहीं पहुंचने के कई बहाने लगा रहे हैं। कुछ बीमार होने या फिर घर में जरूरी काम का बहाना बना रहे हैं। निदेशालय ने सख्ती दिखाते हुए सभी शिक्षकों को शिविर में अनिवार्य रूप से शामिल होने को कहा है। गंभीर बीमारी वाले, गर्भवती महिला या जिनके छह माह का बच्चा है। उन्हें छूट दी है। जिस महिला के तीन साल से कम उम्र के बच्चे हैं। उन्हें अकादमिक सत्र बाद घर जाने की छूट है। शिविर का शुभारंभ एडीपीसी गोपाल प्रसाद मीणा ने किया। पूसाराम चौधरी, मनीष सहित अन्य केआरपी मौजूद थे।
शिविर
कस्तूरबा विद्यालय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रीष्मकालीन आवासीय प्रशिक्षण शिविर शुरू
रोजेदार को रात्रि विश्राम में छूट, बाकी की उपस्थिति जरूरी, बायोमेट्रिक से लगेगी शिक्षको की रोजना हाजरी
शिक्षकों को शिविर स्थल पर ही छह दिन तक अकादमिक सत्र के बाद रात्रि विश्राम करना होगा। रोज सुबह 8 बजे और रात 8 बायोमेट्रिक से हाजरी अनिवार्य होगी। केआरपी (की-रिसोर्स पर्सन) शिक्षकों को ट्रेनिंग देंगे। एक केंद्र पर शिक्षकों के अलग-अलग बैच बनाए गए है। इधर, रमजान के महीने को देखते हुए रोजेदार टीचर्स को आवासीय शिविर में रात्रि विश्राम में छूट का प्रावधान किया गया है। राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद आयुक्त डॉ. प्रिया बलराम शर्मा ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। जिसमें रोजेदार टीचर्स को अकादमिक सत्र के बाद शिविर से मुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
पाठ्यक्रम बच्चों के लिए बोझ नहीं बने, ज्ञान का निर्माण करें
हिंदी, पर्यावरण, गणित और अंग्रेजी विषयों के शिक्षकों को केआरपी द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले दिन केआरपी प्रशिक्षण में भाग ले रहे शिक्षकों को बताया कि बाल शिक्षा अधिकारी अधिनियम-2009 के अनुसार विद्यार्थी स्वयं समझ ज्ञान का निर्माण करें। बच्चे सामाजिक व स्थानीय परिवेश से जुड़े। ज्ञान का निर्माण बालक स्वयं करता है। शिक्षक सहयोगी की भूमिका निभाएं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी निजी स्कूलों की तर्ज पर बेहतर शिक्षा मिले।