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रियांबड़ी में 20 फीट चौड़ी सड़क पर खड़ी रहती है बसें, कई बार लग जाता है जाम

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | रियांबड़ी

कस्बे के लगातार विकास की ओर अग्रसर होने से दिन प्रतिदिन यहां वाहनों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। लेकिन इसके बावजूद यहां पर बस स्टैंड नहीं होने, बड़े बाजारों व कॉम्पलैक्सों में पार्किंग सुविधा का अभाव, अस्थायी अतिक्रमणों व बाइपास नहीं होने से कस्बे की यातायात व्यवस्था खासी प्रभावित होती है। कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। इसके चलते वाहन चालकों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन इन सबके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

कस्बे से दिनभर गुजरने वाली बसों व निजी वाहनों के यहां अस्थायी रूप से खड़े होने के लिए कोई स्थान निर्धारित नहीं है। जिससे कस्बे के बीच से गुजर रही सड़क पर जहां जगह मिलती है, वहां बसें खड़ी हो जाती है। यहां घनी आबादी क्षेत्र में एक किलोमीटर दायरे में महज 15 से 20 फीट चौड़ी सड़क पर दिन भर निजी व रोडवेज बसें खड़ी रहती है। जिसके भी दोनों ओर अस्थायी अतिक्रमण है। बसें खड़ी होते ही वाहनों का जाम लग जाता है। ऐसे में बसें यहां 5 मिनट भी खड़ी नहीं हो पाती है। जिसकी वजह से अक्सर यात्रियों को बसों के पीछे भागते देखे जाते है। जिससे हर समय दुर्घटना का भी अंदेशा बना रहता है।

कस्बे में वाहनों के आवागमन की संख्या बढ़ने व लूनी नदी क्षेत्र से दिन भर सैकड़ों की संख्या में बजरी के डंपर व ट्रैक्टर गुजरते रहते हैं। लेकिन इसके बावजूद रिंग रोड व बाइपास नहीं होने से उपखंड मुख्यालय की यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बस स्टैंड क्षेत्र में छोटे वाहनों के साथ ही दिनभर बजरी के बड़े-बड़े ट्रोलों की रेलमपेल के चलते लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है कस्बे की तीनों बैंकों राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक, एसबीआई बैंक व दी नागौर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की बिल्डिंगों में पार्किंग सुविधा का अभाव होने के चलते बैंक में दूर-दराज के गांवों से आने वाले किसान, व्यापारी, राज्य व केंद्रीय कर्मचारी समेत आम जन बैंक के बाहर मुख्य सड़क पर ही दुपहिया वाहनों को खड़ा कर देते है। इस कारण दिन में कई मर्तबा लगने वाले जाम से स्थानीय लोग खासे परेशान होते है। इसके अलावा आपातकालीन स्थिति में मरीजों को जब चिकित्सालय में उपचार के लिए पहुंचाना हो तो ये बेतरतीब वाहन परिजनों के लिए मुसीबतें बढ़ा देते है।

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