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प्रदेश से सब्जियों का निर्यात बढ़ाने के लिए अपनानी होगी कांट्रेक्ट फार्मिंग

3 वर्ष पहले
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किसानों की आय दोगुनी करने में सब्जियाें का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। इसमें भी अगर निर्यात के रास्ते आसान हो जाएं तो यह और अधिक उपयोगी हो सकती है। देश से सब्जियों का कुल निर्यात 2.8 हजार करोड़ रुपए का होता है, जबकि राजस्थान से निर्यात 75 से 80 करोड़ रुपए सालाना ही है। राजस्थान में सब्जियों का निर्यात बढ़ाना है, तो इसके लिए कांट्रेक्ट फार्मिंग और संरक्षित खेती को बढ़ाना होगा। कांट्रेक्ट फार्मिंग से एक्सपोर्ट एश्योर्ड हो जाता है, ताकि मांग और पूर्ति का संतुलन बना रह सके। यह कहना है राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़े राष्ट्रीय सब्जी फसल अनुसंधान संस्थान वाराणसी के निदेशक डॉ. बिजेंद्र सिंह का। वे 36वे सब्जी फसल की राष्ट्रीय कार्यशाला और ग्रुप मीटिंग में भाग लेने जयपुर आए थे। डॉ. सिंह ने भास्कर से विशेष साक्षात्कार में कहा कि राजस्थान में सब्जी का उत्पादन उल्लेखनीय है, लेकिन यहां से निर्यात काफी कम है। इसे बढ़ाने के लिए कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देना होगा। इससे कांट्रेक्ट पर खेत लेने वाले फर्म या संस्था को इस बात की जानकारी होगी कि उसे अपना उत्पाद कहां और कितना निर्यात करना है और कहां किस चीज की मांग है। इससे किसान को मुनाफा तय मात्रा में लगातार मिलता रहेगा। उसे नुकसान का डर नहीं रहेगा। इससे आय दोगुनी करने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना साकार हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा एक्सपोर्ट कौंसिल की स्थानीय इकाई को भी विशेष ध्यान केंद्रित करना होगा कि किस कंट्री में किस ट्रेड की मांग है।

फैक्ट फाइल : राजस्थान में सर्वाधिक पैदावार प्याज की

राजस्थान में 1.70 लाख हैक्टेयर में सब्जियों की 10.8 लाख मैट्रिक टन पैदावार होती है। इसमें सभी तरह की सब्जियां शामिल हैं। इसमें सर्वाधिक 63.3 प्रतिशत प्याज होती है। इसके बाद आलू 12.2 प्रतिशत, टमाटर 5 प्रतिशत, 4.3 प्रतिशत गोभीवर्गीय सब्जी, 2 प्रतिशत मटर, 1.7 प्रतिशत बैंगन, 1.5 प्रतिशत लौकी, 1.3 प्रतिशत तरबूज, 1.1 प्रतिशत पालक और 1.1 प्रतिशत गाजर का उत्पादन शामिल है। सब्जियों के उत्पादन में जोधपुर अग्रणी है, यहां राज्य की 27.5 प्रतिशत सब्जियां होती हैं। सीकर में 21.7 प्रतिशत, नागौर में 10.4, धौलपुर में 8.2, जयपुुर में 5.3 और अलवर में 5.14 प्रतिशत सब्जियां होती हैं। सब्जियों की मात्रा बढ़ाने के लिए किसानों और वैज्ञानिकों दोनों को प्रयास करने होंगे, तभी 2022 तक किसान की आय दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल हो पाएगा।

मल्टी स्टोरी एग्रीकल्चर से बढ़ेगी आय

डॉ. बिजेंद्र सिंह का मानना है कि किसानों को मल्टी स्टोरी एग्रीकल्चर व्यवस्था को अपनाना चाहिए। इसके लिए पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें पौध को ऊपर लोहे के एंगल से बांधकर रखने से एक तो उनकी बढ़वार ज्यादा होती है, दूसरा पौधा सीधा खड़ा रहने से अन्य फसल के लिए भी जगह मिल जाती है। इससे आय बढ़नी है। मल्टी स्टोरी व्यवस्था को अपनाना इसलिए भी जरूरी हो गया है क्योंकि परिवार बढ़ने के साथ ही जमीन की जोत कम होती जा रही है।

क्या है कांट्रेक्ट फार्मिंग

कांट्रेक्ट फार्मिंग का मतलब खेत को किसी व्यक्ति, संस्था, फर्म या कंपनी को ठेके पर देना। इसमें कांट्रेक्टर उस खेत में अपनी पसंद की सब्जी या फसल उगवाता है। इसके लिए कांट्रेक्टर किसान को बीज और खाद सहित अन्य संसाधन उपलब्ध करवाता है। इसके अलावा किसान को उसकी जमीन का उपयोग करने के बदले तयशुदा राशि उपलब्ध करवाता है। इसमें किसानों को नुकसान होने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है। कांट्रेक्ट फार्मिंग के लिए राजस्थान में भी कानून बना है और इसके तहत किसान और कांट्रेक्टर दोनों के अधिकारों का संरक्षण होता है।

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