शहादत | डीडवाना के मावा के सूबेदार अब्दुल सत्तार ने जयपुर के अस्पताल में ली आखिरी सांस, आज पैतृक गांव में सैन्य सम्मान से किया जाएगा सुपुर्दे खाक
भास्कर संवाददाता | नागौर / डीडवाना
डीडवाना के मावा निवासी सूबेदार अब्दुल सत्तार (47) कश्मीर के गुरेज सेक्टर में 12 मई को बंकर में आग लगने से झुलस गए थे। उन्होंने जयपुर में रविवार रात को आखिरी सांस ली। मावा में मंगलवार सुबह 8 बजे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें सुपुर्दे खाक किया जाएगा।
सेना के अफसरों ने बताया कि सूबेदार अब्दुल सत्तार 13 ग्रेनेडियर्स गंगा जैसलमेर रेजिमेंट में थे। वे कश्मीर में पाकिस्तान सीमा (एलओसी) पर 13,250 फीट स्थित शीर्ष चोटियों में से एक गुरेज पोस्ट पर तैनात थे। वे 12 मई को पेट्रोलिंग कर बंकर में लौटे थे। सर्दी से बचने के लिए जलाए जाने वाले केरोहीटर में अचानक आग लग गई। उन्होंने बहादुरी दिखाते हुए बंकर में मौजूद अपने एक साथी को बाहर निकाला। इसके बाद बंकर के स्टोर में मौजूद भारी मात्रा में ग्रेनेड, हथियार व असला-बारूद को बचाने में जुट गए। वे 15-20 मिनट तक आग के बीच हथियारों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाते रहे। इस बीच उनके कपड़ों ने आग पकड़ ली। इससे वे 50 फीसदी तक झुलस गए थे। उन्हें श्रीनगर के बेस अस्पताल और फिर दिल्ली में सेना के अस्पताल लाया गया।
आठ दिन तक बहादुरी दिखाते हुए लड़े मौत से
जितनी बहादुरी सुबेदार सत्तार ने साथी और हथियारों को आग से बचाने में दिखाई। उतनी ही बहादुरी से वे आठ दिन तक मौत से लड़ते रहे। श्रीनगर व दिल्ली में सेना के अस्पताल में संघर्ष करने के बाद जयपुर में उन्होंने रविवार रात को आखिरी सांस ली। उनकी पार्थिव देह सोमवार रात को जयपुर होते हुए डीडवाना रवाना की गई।
झुलसे तो भी सूबेदार सत्तार ने 20 मिनट तक हथियार बचाए, शहीद
पिता कैप्टन पद से रिटायर्ड, छोटा भाई भी अभी उन्हीं की रेजिमेंट में कश्मीर में तैनात
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल मदनसिंह जोधा ने बताया कि सूबेदार सत्तार के पिता जीवण खान भी सेना में कैप्टन पद से रिटायर्ड हैं। छोटा भाई अब्दुल गफ्फार भी सेना में हैं। अब्दुल सत्तार तीन भाई और तीन बहनों में सबसे बड़े थे। उनकी पांच लड़कियां हैं। इनमें से तीन की शादी हो चुकी है। एक बेटा है जो सबसे छोटा है। 13 ग्रेनेडियर्स के 2 ऑफिसर भी सूबेदार सत्तार को अंतिम सम्मान देने के लिए जयपुर पहुंचे। अब मंगलवार सुबह उनके गांव में सैन्य सम्मान के साथ उनकी देह सुपुर्दे खाक की जाएगी।
आखिरी बार आठ महीने पहले आए थे मावा, जून में छुट्टी पर आने वाले थे
परिवार के लोगों ने बताया कि सूबेदार अब्दुल सत्तार आठ महीने पहले आखिरी बार छुट्टी पर मावा गांव आए थे। इसके बाद से वे लगातार कश्मीर में पाकिस्तानी सीमा पर ड्यूटी दे रहे थे। जून में रास्ता खुलने के बाद वे वापस छुट्टी पर आने वाले थे। लेकिन हादसे का शिकार हो गए। परिवार के लोगों के अनुसार, सूबेदार सत्तार के पिता जीवण खान पांच-सात दिन पहले ही अस्पताल से घर आए हैं। उनकी बीमारी के समय भी अब्दुल सत्तार घर नहीं आ पाए थे।