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36 साल पहले 25 पैसे किलो का बर्फ ला खोलते थे रोजा, वैसी गर्मी फिर, पहली इफ्तार शाम 7.19 बजे

3 वर्ष पहले
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नेअमतों व बरकतों के मुकद्दस माह रमज़ानुल मुबारक की शुरुआत गुरुवार शाम को पहली तरावीह की नमाज के साथ हो गई। हिलाल कमेटी ने बताया कि शुक्रवार को पहला रोजा 15 घंटे 3 मिनट का होगा। तेज गर्मी में रमजान माह 36 साल बाद आया है। हर दूसरे दिन 2 से 3 मिनट का समय बढ़ेगा।

शहर काजी मोहम्मद मेराज उस्मानी ने बताया कि शहर की मस्जिदों में गुरुवार रात को ईशां की नमाज के साथ पहली तरावीह की नमाज अदा की गई। शुक्रवार को तड़के 4:15 बजे से पहले सेहरी कर रोजा रखा गया। आज शाम को पहले रोजे की इफ्तार शाम 7:19 बजे होगी। इसी प्रकार शनिवार को सुबह 4:14 बजे सेहरी समाप्त होगी। पहले रोजे के दिन ही पहला जुम्मा भी है। पहले जुम्मा की नमाज शहर की प्रमुख जामा मस्जिदों में अदा की जाएगी। प्रमुख मस्जिदों समेत अकबरी जामा मस्जिद में भी तैयारियां की गई हैं।

पहला रोजा 15 घंटे 3 मिनट का, हर दो दिन में 2 से 3 मिनट बढ़ेगा इफ्तार का समय

36 साल पहले: यह 4 चीजें थीं, जो अब बदल गई हैं

1. शहर काजी के अनुसार मई माह की गर्मी में 36 साल बाद रोजे आए हैं। उस समय फैक्ट्रियों से बर्फ ला यहां बेचते थे।

3. गर्मी में रोजेदार तालाबों में जा नहाते और राहत पाते थे। अब तालाब गंदे हैं।

परंपरा नागौर की: तोप व सायरन से देते हैं सूचना

सैयद सैफुद्दीन जिलानी रोड़ पर दरगाह बड़े पीर साहब के सज्जादा नशीन सैयद सदाकत अली जिलानी ने बताया कि रोजेदारों को इफ्तार व सेहरी की जानकारी देने के लिए सबसे बड़ा सायरन लगाया हुआ है। अकबरी जामा मस्जिद में तोप छोड़कर सूचना देने की परंपरा है।

2. बिजली पूरी नहीं थी, गीला कपड़ा कर बदन पर रखते और गर्मी से बचते, अब एसी व कूलर।

4. पहले फ्रीज नहीं थे, अब अधिकांश घरों में हैं।

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