बजट घोषणा के तहत जिले के 210 स्मार्ट गांवों में अब कई काम मनरेगा योजना के तहत करवाए जा सकेंगे। इससे मनरेगा में नियोजित श्रमिकों को रोजगार मिलने में आसानी होगी। इस संबंध में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त मनीष चौहान ने पिछले दिनों आदेश जारी किए हैं। इसमें बताया कि मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के तहत नागौर जिले में 210 स्मार्ट विलेज विकसित किए जाने हैं। इनमें विभागीय बजट और कन्वर्जेंस से काम करवाए जाने हैं।
ऐसे गांवों में अब मनरेगा योजना से भी 9 काम करवाए जा सकते हैं। आदेश के अनुसार, गौरव पथ के तहत बनी सीसी सड़क के दोनों तरफ पक्की नालियों और जल निकासी प्रबंधन कार्य, आंतरिक सड़क, गलियों में इंटरलॉकिंग ब्लॉक, सीसी सड़क, पत्थर या ईंट खरंजे का निर्माण मनरेगा से करवाया जा सकता है।
सार्वजनिक पार्क की जमीन समतलीकरण व पौधरोपण, गांव के खेल मैदान में विकास कार्य, चरागाह विकास के लिए खाई, मिट्टी की चारदीवारी निर्माण, पौधरोपण और चरागाह विकास के काम, गांव में व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालय निर्माण और स्वच्छता संबंधी काम भी मनरेगा के तहत करवाए जा सकेंगे। इसके साथ ही पात्र लाभार्थियों के खेत में खेत समतलीकरण, खेत तलाई, फलदार पौधरोपण, फॉर्म पौंड, कैटल शैड और वर्मी कंपोस्ट पिट, खाद गोदाम निर्माण और आदर्श तालाब या नदी के किनारे सामुदायिक महिला स्नानागार निर्माण के कार्य भी मनरेगा के तहत करवाए जा सकेंगे।
स्मार्ट विलेज की संख्या में दूसरे नंबर पर है नागौर
जिले में स्मार्ट विलेज की संख्या के लिहाज से नागौर प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर जयपुर है। जहां सबसे ज्यादा 233 स्मार्ट विलेज बनेंगे। 210 गांवों के साथ नागौर दूसरे स्थान पर और 187 गांवों के साथ सीकर तीसरे स्थान पर है। अलवर में 175 गांवों को स्मार्ट बनाया जाएगा। जबकि सबसे कम 17 स्मार्ट विलेज जैसलमेर में होंगे।