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आवास योजना के हाल : पहली किस्त मिली तो तोड़कर बनाने लगे घर, किस्तें अटकी... अब गिरवी रखे जेवर, ब्याज के रुपए से कर रहे निर्माण

3 वर्ष पहले
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पीएम आवास योजना हितग्राहियों के लिए जंजाल बन गई है। जो लोग योजना का लाभ लेकर पहली या दूसरी किस्त ले चुके वे तीसरी किस्त अटकने से आधे-अधूरे मकान को देखकर खुद को कोस रहे हैं। शहर के अधिकांश वार्डों में यही स्थिति है। उन वार्डों में हालात और बुरे हैं जिस वार्ड का पार्षद कांग्रेसी है। भास्कर टीम ने दो वार्ड की पड़ताल कर जमीनी हकीकत टटोली तो ढाई लाख अनुदान के लालच में कई हितग्राही अब ब्याज के चक्रव्यूह में उलझ गए हैं। किसी ने जेवर बेचकर मकान का काम पूरा किया है। तो कोई टूटे मकान में ही बच्चों का ब्याह कर रहा है। योजना के तहत पहले चार किस्तों में ढाई लाख की अनुदान राशि जारी की जाती है। नए नियमों में अब तीन किस्तों में ही अनुदान जारी करने की व्यवस्था लागू की गई है। नपा के आवास सेल के अधिकारियों ने भी माना कि किस्तें जारी करने की प्रक्रिया में देरी हो रही है, लेकिन इसका कारण हितग्राही ही है। जो योजना के लाभ के लिए शासन की तय गाइड लाइन का पालन नहीं कर रहे। इसलिए परेशान भी वे ही हो रहे हैं।



ये हैं कोटा फाटक, पुवाड़लिया और स्लम बस्ती के चार हितग्राही...जिनके लिए मुसीबत साबित हुई आवास योजना

2 प्रतिशत ब्याज पर लिए रुपए

वार्ड 15 कोटा फाटक निवासी सुशील उचेनिया की तीन महीने पहले 60 हजार की पहली किस्त आई थी। जिससे उन्होंने पेढ़ी भर ली। उसके बाद किस्त अटक गई। तब सुशील ने 1 लाख रु. के सोने के आभूषण 2 प्रतिशत ब्याज पर गिरवी रख दिए। 1 लाख रु. 2 प्रतिशत ब्याज पर उधार लिए। जिनसे सुशील ने हाइट खड़ी कर सेटिंग डलाई। अब तक दूसरी किस्त उन्हें नहीं मिली है।

विवादित जमीन पर ले लिया योजना का लाभ

मेहतवास के पूरालाल पिता भागीरथ ने कोर्ट में विवादित जमीन पर आवास योजना का लाभ ले लिया। नपा ने 60 हजार की पहली किस्त भी जारी कर दी। जमीन इसलिए विवादित है क्योंकि यह आम रास्ता है। शिकायककर्ता दिनेश दुबे ने एसडीएम को शिकायत कर काम रुकवाने का अनुरोध भी किया। तहसीलदार ने पटवारी को आदेश भी दिए, लेकिन काम नहीं रुका। हारकर दुबे ने भूख हड़ताल की चेतावनी दी इसके बाद राजस्व अमले ने मौके पर पहुंचकर काम रुकवाया।

टूटे मकान में की बच्चों की शादी

पुवाड़लिया की सीताबाई को जनवरी में प्रमाण पत्र मिला था। मकान का अगला हिस्सा तोड़ दिया, मगर किस्त खाते में नहीं पहुंची। बेटे राहुल व रानू के विवाह की तारीख नजदीक आ गई। 18 अप्रैल को सीताबाई ने दोनों का विवाह टूटे मकान में किया। कुछ मेहमानों को भी वहीं ठहराया, बाकी को टेंट में। सीताबाई जनवरी से इंतजार कर रही है, मई भी आधा गुजर गया है। लेकिन पहली किस्त ही नहीं डली है।

इनकी लापरवाही- जवाबदेह हितग्राही व शासन

भास्कर ने इतनी बड़ी योजना के बुरे परिणाम सामने आने पर सच टटोला तो पता चला कि मामले में हितग्राही लापरवाह है और शासन सुस्त। हितग्राही कागजी खानापूर्ति समझ नहीं रहे। वहीं शासन ने जिस निजी एजेंसी एजीस को योजना की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी है, उसके पास स्टाफ ही नहीं है। वाे समय पर निर्माण कार्य की प्रगति पोर्टल पर अपडेट नहीं कर पा रहे। इससे भी नपा को समय पर किस्त जारी करने के लिए बजट नहीं मिल रहा।

किराए के मकान में रहना पड़ रहा

पुवाड़लिया के मानसिंह और भारत भाई हैं। दोनों ने योजना में आवेदन किया था। भारत को पहली किस्त मिल गई, लेकिन मानसिंह को नहीं मिली। भारत ने स्वयं और भाई के मकान की नींव भरवाई। परेशानी तब खड़ी हुई जब भारत को दूसरी किस्त नहीं मिली। पेढ़ी भराई में भरत ने सरिए उधार लिए थे। अब ब्याज पर 20 हजार रु. लेकर आधे रुपए सरिए के चुकाए। किस्त अटकने से दोनों भाई किराए के मकान में रहते हैं।

छत अधूरी, क्योंकि किस्त अटकी

वार्ड 4 स्लम बस्ती में रहने वाली मुन्नीबाई पति भंवर के खाते में हाइट के पैसे आने के बाद वह काम पूरा कर लिया। अप्रैल में 60 हजार रु. डले थे। उसके बाद छत की किस्त फिर अटक गई है। मुद्दे को भास्कर के उठाने के बाद नपा ने बाकी की राशि हितग्राही के खाते में डाली। मगर अब शेष किस्त अटकने से मुन्नीबाई किराए के मकान में रह रही है। बता दें कि यह वार्ड भी कांग्रेस पार्षद हुर बानो मेव का है।

इसलिए जारी नहीं हो रही किस्त

नपा के आवास योजना सेल के अनुसार जिन हितग्राहियों की किस्त अटकी है उसका कारण जन-धन योजना में खोले गए बैंक खाते हैं। जिनमें नकदी जमा करने की लिमिट है। उससे अधिक राशि जमा होने पर खाता ब्लॉक हो जाता है। अगर जन-धन खाते की लिमिट 1 लाख है तो नपा चाहकर भी 60 हजार की पहली किस्त के बाद दूसरी किस्त जारी नहीं कर पाती।

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