नाला प्रखंड क्षेत्र में जल संचयन करने तथा इसके लिए महत्वपूर्ण योजना का चयन करने के उद्देश्य से शनिवार को प्रखंड सभागार में बैठक हुई। बैठक में उपस्थित मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक, वार्ड सदस्य एवं समाज सेवियों ने जल संचयन एवं इसके लिए संभावित उपाय के बारे में अपना अपना विचार रखा। समाज के लिए इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की चर्चा करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी सुनील कुमार प्रजापति ने कहा कि यह बात किसी से छीपी नहीं है कि जमीन का जलस्तर नीचे की ओर जा रहा है। आगे भी अगर यही गति रहा तो वह दिन देर नहीं जब हमें जल के लिए तरसना होगा। बताया गया कि प्राप्त आंकड़ा के अनुसार अगर जल संचयन के प्रति ध्यान नहीं दिया गया तो दो दशक के बाद जल संकट का विकराल रूप दिखने लगेगा। उन्होंने सबों से अपील करते हुए कहा कि विवाह, जन्म उत्सव या किसी मांगलिक अनुष्ठान को याद रखने के लिए अपने जीवन में 5-10 पौधा अवश्य लगायें। इतना ही नहीं पेड़ लगाना और वर्षा की प्राप्ति तथा जीवन का अस्तित्व के लिए पर्यावरण की रक्षा आदि के बारे में दूसरो को भी बताने की जरूरत है। मौके पर जियाराम हेम्ब्रम, प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी जाॅन मरांडी, नमिता बास्की, अंबिका, गुलशन अली, बिजली, हीना झा, जीतेन राउत, नित्यजीत बाद्यकर, समर माजि आदि उपस्थित थे।
जल संचयन की बैठक में शामिल अधिकारी व जनप्रतिनिधि।
23 पंचायतों में जल संचयन पर हुई चर्चा
निर्धारित एजेंडा के अनुसार सभी 23 पंचायत में उपलब्ध जल स्रोत एवं संभावित योजना की चर्चा करते हुए बड़कुड़ी, भालजुडि़या, सुंदरबाड़ी, कालीपाथर में तालाब का जीर्णोद्धार, फतेहपुर, सियारकेटिया, कुलडंगाल में डीप बोरिंग, भेड़ो, बामनडीहा, तीलाबनी, हथियापाथर, केंदुआटांड़ जोडि़या में कच्चा चैक डैम आदि का प्रस्ताव ग्रहण किया गया। मनरेगा एवं भूमि संरक्षण विभाग से जल संचयन के लिए योजना का क्रियान्वयन किया जाना है। बिजली कनेक्शन विहीन आंगनबाड़ी केंद्र, पंचायत भवन एवं स्कूल की सूची उपलब्ध कराने के लिए सभी से आग्रह किया गया।