परमात्मा में ध्यान लगाना ही सच्ची भक्ति : आचार्य प्रखर
पूजा, प्रतिक्रमण, दर्शन-वंदन कर घर-दुकान चले यह भक्ति नहीं है। इसके आपको परमात्मा में ही ध्यान लगाना होगा। जब तक परमात्मा आपको प्यारे नहीं लगते, तब तक आपका द्वारा की गई भक्ति-तप सब बेकार है। परमात्मा में ध्यान लगाना ही सच्ची भक्ति है।
यह बात आचार्य प्रखर कीर्तिचंद्र सूरीश्वर ने धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा जल, हवा, अग्नि, अन्न, प्रकाश, ताकत आदि यह परमात्मा को दिया ऋण है। इसके बदले परमात्मा की भक्ति, तप-आराधना, व्याख्यान, पूजा, दान के रूप में ऋण उतारना ही प्रभु भक्ति है। यही आत्मा का उद्धार व मानव जीवन की सफलता का रहस्य है। भक्ति में चार बातें प्रमुख हैं तप, मन, बुद्धि और चरित्र। तप के लिए ताकत होना चाहिए। मन से विचार करना चाहिए। इसके पहले बुद्धि का उपयोग करना जरूरी है। बुद्धि से मन में अच्छे विचार उत्पन्न होकर तप-भक्ति के लिए ताकत पैदा होती है। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे। शनिवार सुबह 5 बजे मुनिमंडल व साध्वी मंडल ने रतलाम की ओर विहार किया।